सांसद डॉ रावत के प्रश्न पर जवाब: वंदे भारत ट्रेन 81 प्रतिशत 110 किलोमीटर से अधिक गति से दौड रही है: रेल मंत्री

-रेल गति को बढाने के लिए रेल मंत्रालय की ओर से कई सारे प्रयास किए गए, -रेलपथ को आधुनिक और बेहतर बनाया गया
उदयपुर। पूर्ण स्वदेशी वंदे भारत ट्रेन 81 प्रतिशत 110 किलोमीटर से अधिक गति से चल रही है। रेल गति को बढाने के लिए रेल मंत्रालय की ओर से कई सारे प्रयास किए जा रहे हैं। रेल पटरियों को पहले से अधिक आधुनिक बनाया गया है जिसमें कई सारे यांत्रिक परिवर्तन भी किए गए हैं।
सांसद डॉ. मन्ना लाल रावत की ओर से संसद में रेल मंत्रालय से संबंधित पूछे गए प्रश्न पर रेल मंत्री अश्विन वैष्णव ने यह जानकारी दी। सांसद डॉ रावत ने वर्तमान में देश भर के विभिन्न रेलमार्गों पर वंदे भारत जैसी सेमी हाईस्पीड रेलगाड़ियों की औसत परिचालन गति को लेकर प्रश्न किया था। साथ ही यह भी जानकारी मांगी थी कि क्या लूप प्वाइंट, समपारों, मोड़ों और गति सीमा संबंधी प्रतिबंधों के कारण इन रेलगाड़ियों की वास्तविक गति उनकी निर्धारित या नियोजित गति से कम हो जाती है। क्या नवनिर्मित अथवा उन्नत रेल खंडों पर भी वंदे भारत रेलगाड़ियां अपनी नियोजित गति से कम गति से चल रही हैं;
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि वर्तमान में भारतीय रेल नेटवर्क पर चल रही वंदे भारत रेलगाड़ियां 180 कि.मी. प्रति घंटे की डिजाइन गति और 160 कि.मी. प्रति घंटे की अधिकतम परिचालन गति वाली सेमी-हाई स्पीड रेलगाड़ी सेवाएं हैं। रेलगाड़ी की औसत गति रेलपथ की ज्यामिति, मार्गवर्ती ठहराव, खंड में अनुरक्षण कार्य आदि पर निर्भर करती है। वंदे भारत रेलगाड़ी सेवाओं को संबंधित खंडों की अधिकतम अनुमेय गति पर निर्धारित किया गया है जिन पर यह रेलगाड़ियां परिचालित की जा रही हैं। इसके अलावा, भारतीय रेल में रेलगाड़ी सेवाओं की गति बढ़ाना एक सतत प्रक्रिया है।
भारतीय रेल में रेल पटरी का सुदृढ़ीकरण, अपडेट करने, आधुनिकीकरण और सुधार एक सतत एवं निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। भारतीय रेल द्वारा रेलपथ को अपडेट करने के लिए प्राथमिक रेलपथ नवीकरण करते समय 60 किग्रा की आधुनिक रेलपथ संरचना, 90 अल्टीमेट टेन्सिन स्ट्रेंथ (यूटीएस) पटरियां, प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट स्लीपर (पीएससी) नोचदार बंधन वाले सामान्य/चौड़े स्लीपर, पीएससी स्लीपरों पर फैनशेप्ड लेआउट टर्नआउट, गर्डर पुनों पर स्टील चैनल व एच-बीम स्लीपर्स का उपयोग किया जाता है।
टर्नआउट नवीनीकरण कार्यों में शिक वेब स्विच और वेल्ड करने योग्य सीएमएस क्रॉसिंग का उपयोग किया जा रहा है। ज्वाइंटों की वेल्डिंग से बचने के लिए 260 मीटर लंबे पटरी पैनलों की अधिकतम आपूर्ति की जा रही है जिससे संरक्षा और यात्रा गुणवता में सुधार किया जा सके। पूर्ववर्ती पारंपरिक बेहतर एसईजे के स्थान पर धिक वेब स्विच विस्तार ज्वाइंटों का उपयोग किया जा रहा है। पटरियों के लिए बेहतर वैल्डिंग तकनीक अर्थात फ्लैश बट वेल्डिंग अपनाई जा रही है। समपार फाटक पर संरक्षा बढ़ाने के लिए समपार फाटक की इंटरलॉकिंग की जा रही है।
रेल मंत्री ने बताया कि इन उपायों के परिणामस्वरूप रेलपथ की गति क्षमता में बहुत अधिक बढ़ोतरी हुई है।

By Udaipurviews

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