धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया प्रथमेश-2026 भगवान ऋषभदेव का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव’

संस्कृति को बचाना है तो बच्चों को धार्मिक संस्कार एवं धार्मिक शिक्षा देंः मुनिवृन्द’
उदयपुर। समग्र जैन समाज की ओर से श्री मेवाड़ जैन युवा संस्थान द्वारा ’जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर, युग सृष्ठा भगवान श्री ऋषभदेव का जन्म एवम् तप कल्याणक महोत्सव’प्रथमेश 2026’ आज धूमधाम ,हर्षेाल्लस के साथ मनाया गया।
संस्थान के संरक्षक पारस सिंघवी व अध्यक्ष निर्मल मालवी ने बताया कि गुरुवार प्रातः 7 बजे जैन धर्म के साधु-सन्तों के सानिध्य में नगर निगम प्रांगण’ में ’ध्वजारोहण’ किया गया जिसके पुण्यार्जक महावीर,साहिल वनावत थे । समाज प्रमुख शांतिलाल  वेलावत, महेंद्र टाया आदि की उपस्थिति में अभूतपूर्व उत्साह के साथ शहर में भ्रमण के लिये शोभायात्रा निकाली गयी। विभिन्न स्थानों पर 20 से ज्यादा स्वागतद्वार लगाये गये जहां पर समाज के महिला पुरूष समूहों मेें एक साथ खड़े होकर शोभायात्रा का स्वागत किया। शोभायात्रा ’टाउन हॉल से प्रारंभ होकर सूरजपोल चैराहा, झीणीरेत,मार्शल चैराहा,मंडी की नाल, देहलीगेट, बापू बाजार, होते हुए पुनःटाउन हॉल पहुंच कर धर्मसभा में परिवर्तित हो गयी। सवेरे- सवेरे भी तीखी धूप और भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा। जहां-जहां भी स्वागत द्वार बने थे, श्रद्धालुओं न शोभा यात्रा का भव्य स्वागत किया एवं रत्नत्रयधारी साधुवृन्दों का आशीर्वाद लिया।
शोभायात्रा की भव्यता का अन्दाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टाऊन हॉल से प्रारम्भ हुई शोभा यात्रा गाजे-बाजे के साथ जब 9.15 बजे के करीब देहलीगेट पहुंची, तो उसके आगे वाला छोर बापू बाजार पार करके टाऊनहॉल पहुंच चुका था। शोभा यात्रा में समाजजन लगातार धर्मध्वज फहराते, महिलाएं हाथों में प्रथमेश की झांकी लेकर भक्ति नृत्य करती चल रही थी। बच्चों से लेकर युवा और वृद्ध सभी का उत्साह तीखी धूप के बावजूद चरम पर था। समाज के प्रमुख संगठनों द्वारा प्रभावना वितरित की गई ।
शोभायात्रा में श्री आदिनाथ जिनालय सेक्टर 11 के गुरु सेवा संघ द्वारा जिनेंद्र प्रभु का रथ, घोड़े, बग्गियों, बैंड, ढोल,अग्रवाल बाल मंदिर का घोष, भक्ति महिला संघ का घोष ,श्री बीसा नरसिह्नपुरा नवयुवक मंडल का घोष स्वर लहरिया बिखेरते हुए चल रहा था। शहर के प्रमुख मार्गों से शोभायात्रा में आचार्य संघ-आर्यिका संघ 51 से अधिक पिछीधारी संतों का सानिध्य पाकर समाजजन में हर्ष और उल्लास का माहौल था। शोभायात्रा जहां- जहां से भी गुजरी भगवान ऋषभदेव के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा।
शोभायात्रा में महिला प्रकोष्ठ से श्रीमती लीला कुर्दिया, सुशीला कारवां ,अर्चना पटवारी,रेखा लोलावत,संगीता गोददोत ,निर्मला सोनी आदि के सहयोग से 24 से अधिक जीवंत झांकी, महिला मंडल के घोष, प्रभु के जन्मोत्सव की बधाई का गायन,वादन करते हुए चल रहे थे।
संस्थान के कार्याध्यक्ष शान्तिलाल गांगावत,महामंत्री डॉ.राजेश देवड़ा व मंत्री गौरव गनोडिया ने बताया कि मंगलाचरण के उपरांत उदयपुर नगर में विराजित ’आचार्यकल्प 108 श्री पुण्यसागरजी ससंघ, आचार्य 108 श्री विहर्षसागरजी ससंघ,आचार्य 108 श्री मयंक सागर जी ससंघ ,गणिनी आर्यिका 105 श्री सुभूषणमति माताजी ससंघ ,आर्यिका 105 श्री प्रसन्नमति माताजी’ की उपस्थिति रही।
संस्थान के कोषाध्यक्ष हेमन्द्र दामावत,अशोक गोड़दोत ने बताया कि कार्यक्रम के पश्चात सभी साधर्मी श्रावक-श्राविकाओं के लिये स्वामी वात्सल्य की व्यवस्था रखी गई।
टाऊन हॉल में आयोजित धर्मसभा में गणिनी आर्यिका 105  श्री सुप्रकाशमति माताजी संसघ एवं आर्यिका 105 श्री प्रसन्नमति माताजी ने अपने धर्मोपदेश में प्रथमेश भगवान ऋषभदेव की महिमा बताते हुए उनके द्वारा बताये गये मार्ग पर चलने का आव्हान किया। उन्होंने धर्मसभा में उपस्थित माताओं- बहनों से कहा कि बच्चों को संस्कार देना आपका काम है। आज की पीढ़ी की विडम्बना यह है कि उनका झुकाव पाश्चात्य संस्कृति की और ज्यादा हो रहा है। इन्हें रोके बिना हम जैन धर्म को बढ़ावा नहीं दे सकते। हमें हमारी संस्कृति को बचाना है तो बच्चों में धार्मिक संस्कार और उन्हें धार्मिक शिक्षा देना अत्यन्त आवश्यक है। भगवान ऋषभदेव ने हमें जीवन की कला सिखाई है, वही कला आप स्वयं भी सीखें ओर अपने बच्चों को भी वही शिक्षा देकर बच्चों को धर्म संस्कार दें। आज कल के बच्चे माता-पिता के कहने में नहीं होते हैं और उनकी सेवा करना भी उन्हें बोझ लगता है। अगर आप उन्हें भगवान ऋषभदेव के बताये संकार और शिक्षाएं उन्हें देंगे तो निश्चित ही उनके जीने के तरीके में बदलाव आएगा।
उसके बाद धर्मसभा को आचार्यकल्प 108 श्री मयंकसागरजी एवं आचार्य 108 श्री विहर्षसागरजी महाराज ने सम्बोधित करते हुए एक स्वर में समाज की एकता और अखण्डता पर बल दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब वक्त आ गया है कि आप अपने परिवार को बढ़ाएं। कम से कम एक परिवार में चार बच्चे तो होने ही चाहिये। अगर आप अपना परिवार छोटा ही रखोगे तो जैनियों की संख्या कभी नहीं बढ़ पाएगी। आचार्यकल्प 108 श्री पुण्य सागरजी ने कहा कि पहले के समय में एक परिवार में पांच से ज्यादा बच्चे हुआ करते थे। लेकिन आज के समय में हम दो हमारे दो, बाकी को जानंे दो। ऐसा करने से काम नहीं चलेगा। आज जैनियों की संख्या आंकड़ों के अनुसरार 45 लाख है, उसका कारण क्या है। कारण यह है कि हम जैनी हमारे नाम के पीछे गौत्र तो लगा देते हैं लेकिन जैन नहीं लगाते हैं। जैन नहीं लगाने से हमारी संख्या की असली पहचान हो ही नहीं पाती। हमें कम संख्या में जानकर लोग हम पर हावी हो रहे हैं। आज भी हमारे कई ऐसे धार्मिक स्थल और तीर्थ हैं जिन पर या तो लोगों ने कब्जा किया हुआ है या वो कब्जा करने की फिराक में घूम रहे हैं। उसका एक ही कारण है कि हमारी संख्या अनुपात में कम हैं। आज हमारी गिनती अगर 45 लाख में होती है और अगर सभी जैन अपने नाम के पीछे गौत्र के साथ जैन लगाना शुरू कर देते हैं हमें 3 करोड़ बनने में देर नहीं लगेगी। आचार्यश्री ने उपस्थित सभी समाजजनों से अपने नाम के पीछे गौत्र के साथ जैन लगाने का भी संकल्प दिलाया।
धर्मसभा का प्रारम्भ मंगलाचरण बाल ब्र.वीणा दीदी द्वारा, दीप प्रज्वलन, साधु-सन्तों के पादप्रक्षालन, जिनवाणी एवं शास्त्र भेंट के साथ हुआ। इस दौरान अध्यक्ष निर्मल मालवी एवं संरक्षक पारस सिंघवी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए सभी को प्रथमेश के भव्य आयोजन की बधाईयां दी। इस दौरान श्रावक श्रेष्ठी श्रीमान महावीर जी मिण्डा को मरणोपरांत श्री मेवाड़ समाज गौरव अलंकरण की उपाधि से नवाजा गया वहीं श्रावक रत्न श्री जयंतीलाल जी भगवतीलालजी  विनोद जी चाहत रजावत को युवा गौरव अलंकरण प्रदान किया गया।
संगठन के उपाध्यक्ष पारस कुणावत, विमल नाथुत, मनोज गदिया,अरूण लुणदिया,अनिल सकरावत,राजेश गदावत,राजेन्द्र चित्तौड़ा,संजय गंागावत,प्रितेश वगेरिया,रविश मुण्डलिया ने इस आयोजन में मुख्य भूमिकाएं निभाई।

By Udaipurviews

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