कार्यक्रम संयोजक रमेश दतवानी ने बताया कि संतोष आनंद का जन्म 5 मार्च 1929 को हुआ था। उनके जन्म वर्ष ’29’ को विशेष सम्मान देने के उद्देश्य से सदस्यों ने उन्हीं के लिखे 29 चुनिंदा गीतों की श्रृंखला पेश की। इस पूरे कार्यक्रम की वीडियोग्राफी करवाई गई है, जिसे डिजिटल माध्यम से सीधे संतोष आनंद को प्रेषित किया जाएगा ताकि वे उदयपुर के प्रशंसकों का प्यार और सम्मान महसूस कर सकें। इस संगीतमय शाम में “एक प्यार का नगमा है”, “जिंदगी की ना टूटे लड़ी”, “मोहब्बत है क्या चीज़”, “मेघा रे मेघा रे” और “ये गलियां ये चौबारा” जैसे कालजयी गीतों की गूंज पर श्रोता मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि झूमर चक्रवर्ती थे।
संस्थापक अध्यक्ष मुकेश माधवानी ने कहा कि संस्था का मुख्य ध्येय संतोष आनंद जैसी महान शख्सियतों के कालजयी कार्यों को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि संतोष आनंद के गीतों में जो गहराई और जीवन का दर्शन है, वह आज के दौर के संगीत में मिलना दुर्लभ है; इसीलिए हमारी संस्था ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में शुद्ध और अर्थपूर्ण संगीत की रुचि को जीवित रखने का प्रयास कर रही है।
संस्था सचिव अरुण चौबीसा ने कहा कि आज की यह शाम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उस कलम के प्रति हमारी कृतज्ञता है जिसने दशकों तक करोड़ों दिलों को सुकून दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी सदस्यों ने मिलकर संतोष आनंद के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।
कोषाध्यक्ष योगेश उपाध्याय ने कहा कि संतोष आनंद के गीतों की लोकप्रियता आज भी बरकरार है और हमारे सदस्यों ने जिस समर्पण के साथ इन गीतों को आत्मसात कर प्रस्तुत किया, वह काबिले तारीफ है। उन्होंने कहा कि ऐसे सफल आयोजनों से संस्था के भीतर एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है जो हमें भविष्य में और भी बेहतर सांस्कृतिक कार्यक्रम करने के लिए प्रेरित करता है।
कार्यक्रम संयोजक रमेश दतवानी ने बताया कि कार्यक्रम में विष्णु वैष्णव, गोपाल गोठवाल, दिलीप जैन, कमलेश कुमावत, अम्बालाल साहू, राजकुमार साहू, प्रकाश परसाई, गिरीश तलदार, जयकिशन आसवानी, नूतन वेदी, संगीता गोस्वामी आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम संचालन चेतना जैन और लक्ष्मी आसवानी ने किया। रमेश दतवानी ने सभी आंगतुकों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
