—कोर्ट ने लगाया 1 लाख का जुर्माना
—स्कूल को सीबीएसई की मान्यता दिलाने के लिए मांगी थी घूस
उदयपुर, 26 नवंबर : कोर्ट ने एक लाख की रिश्वत लेने के मामले में केन्द्रीय विद्यालय के पूर्व प्राचार्य को दोषी ठहराते हुए तीन साल के कारावास एवं 1 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई है। विशिष्ट लोक अभियोजक महेन्द्र ओझा के अनुसार परिवादी डॉ. के.के. नारायण, जो उस समय दयानंद एंग्लो वैदिक हिंदुस्तान जिंक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, राजपुरा दरीबा के प्राचार्य थे, ने 4 मई 2011 को एसीबी को दी लिखित शिकायत में बताया कि उनके स्कूल को सीबीएसई से स्थायी मान्यता दिलाने हेतु एक निरीक्षण समिति गठित की गई थी, जिसमें आरोपी असलम परवेज़ को कन्वेनर बनाया गया था। इस निरीक्षण के बदले परवेज़ ने शुरु में 3 लाख की रिश्वत मांगी, बाद में राशि घटाकर 1 लाख कर दी। शिकायत के बाद एसीबी ने सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई।
इसके बाद 4 मई 2011 को जावर माइंस स्थित गेस्ट हाउस के कमरा नंबर 7 में ट्रैप कार्रवाई की गई। ट्रैप के दौरान आरोपी ने परिवादी से 1 लाख रुपए सीधे हाथ में लेने के बजाय कमरे में रखे एक कैनवास बैग में रखवाए। ट्रैप टीम के पहुंचने पर तलाशी में वह राशि बरामद हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम संख्या-2 की विशिष्ट न्यायाधीश संदीप कौर के समक्ष आरोपी के विरुद्ध 20 गवाह और 38 दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनको मद्देनजर रखते हुए कोर्ट ने उसे दोषी माना और 3 साल के कारावास की सजा सुनाई।
