उदयपुर में मुख्यमंत्री बजट घोषणा से मिल रही किसानों को राहत
वर्मीकम्पोस्ट इकाई निर्माण के लिए मिल रहा अनुदान, किसानों से लाभ उठाने का आह्वान
उदयपुर, 02 सितंबर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश की कृषक हितैषी सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कृषकों के कल्याण के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए कई नवाचारों को अपनाया है। इसी श्रृंखला में परम्परागत खेती में रासायनिक खादों का अंधाधुंध प्रयोग रोकने और मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने के लिए राजस्थान सरकार ने बजट घोषणा 2024-25 अनुरूप वर्मी कंपोस्ट इकाई निर्माण (स्थायी संरचना) कार्यक्रम के तहत अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू की है। इस प्रक्रिया के तहत उदयपुर जिले में भी किसानों से वर्मी कंपोस्ट इकाई निर्माण के लिए अनुदान दिया जा रहा है।
रासायनिक उर्वरकों से खेती की बढ़ती हुई लागत को कम करने और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए पारंपरिक खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ाने के लिए वर्मी कंपोस्ट को प्रोत्साहित करते हुए राज्य सरकार द्वारा जैविक खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे फसलों को उचित पोषण मिलने पर उनकी बढ़ोतरी होगी और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।
जैविक खाद बदलेगी किसानों की तकदीर :
वर्मीकम्पोस्ट एक जैविक खाद है जो कीड़ों, विशेषकर अर्थ वॉर्म के माध्यम से तैयार किया जाता है। इसे खेती में उपयोग करने के कई लाभ हैं। यह मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाता है, जिससे फसलों की वृद्धि में सुधार होता है। वर्मीकम्पोस्ट मिट्टी की संरचना को बेहतर बनाता है, जलधारण क्षमता को बढ़ाता है और सूक्ष्मजीवों की गतिविधि को प्रोत्साहित करता है। यह रासायनिक उर्वरकों के मुकाबले अधिक इको-फ्रेंडली है, जिससे मिट्टी और पानी की गुणवत्ता में सुधार होता है। इसके उपयोग से कृषक लागत में कमी कर सकते हैं और उत्पादन में आशातीत सफलता को देखा जा सकता है।
इस तरह मिलेगा अनुदान :
संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) सुधीर वर्मा ने बताया कि राज किसान साथी पोर्टल पर आवेदन करने पर ’पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर किसान को अनुदान मिलेगा। आवेदनों की अधिकता की स्थिति में लॉटरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। स्थायी वर्मी कम्पोस्ट यूनिट बनाने वाले जिले में जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए वरदान साबित होगी। इससे किसानों का जैविक खेती के प्रति रूझान भी बढ़ेगा।
पचास फीसदी तक मिलेगा अनुदान :
वर्मा ने बताया कि उदयपुर जिले को वर्मी कंपोस्ट की 100 स्थाई इकाई निर्माण के लक्ष्य आवंटित किए गए हैं। स्थायी वर्मी कंपोस्ट इकाई की स्थापना करने पर किसानों को लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 50 हजार रुपये का अनुदान मिलेगा। इसके लिए किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। वर्मी कंपोस्ट उपयोग से मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरा शक्ति को बढ़ावा मिलेगा।
ई मित्र या राज किसान पोर्टल से होगा आवेदन :
मुख्यमंत्री बजट घोषणा में वर्मी कंपोस्ट इकाई स्थापना कार्यक्रम की शुरुआत के लिए विभाग की ओर से दिशा निर्देश जारी किए गए है। स्थाई वर्मी कंपोस्ट इकाई पर अनुदान के लिए किसान के पास एक स्थान पर न्यूनतम कृषि योग्य 0.4 हेक्टेयर जमीन होनी चाहिए। यह यूनिट लगाने के लिए किसानों को नजदीकी ई-मित्र केन्द्र पर जाकर या खुद के स्तर पर राज किसान पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। ऑफलाइन आवेदन पत्र स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यह है तकनीकी आवश्यकताएं :
वर्मा ने बताया कि वर्मी कंपोस्ट इकाई की स्थापना के लिए 30 फ़ीट गुणा 8 फ़ीट गुणा 2.5 फ़ीट आकार के पक्के निर्माण के साथ वर्मी कंपोस्ट इकाई बनाने के बाद आवेदन उपरांत जिला अधिकारी या प्रतिनिधि कृषि पर्यवेक्षक, सहायक कृषि अधिकारी द्वारा इकाई के भौतिक सत्यापन के बाद ही अनुदान जारी किया जाएगा। इसमें तकनीकी रूप से पक्के शेड की ऊंचाई बीच में कम से कम 10 फीट और किनारे से 8 फीट हो। एक इकाई के लिए कम से कम 60 किलोग्राम केंचुए एटीसी, रजिस्टर्ड गैर सरकारी संस्थान, गौशाला, कृषि विज्ञान केन्द्र, कृषि अनुसंधान केन्द्र, कृषि कॉलेज आदि से किसान खरीद सकते है। प्रत्येक बेड में 400-400 ग्राम ट्राइकोडर्मा, पीएसबी, एजोटोबेक्टर कल्चर एवं 1 किलो नीम की खली उपयोग में ली जानी चाहिए। अधिक जानकारी हेतु कृषक विभागीय वेबसाइट पर भी लॉग इन कर सकते है साथ ही राज किसान साथी पोर्टल के हेल्प डेस्क नंबर 0141 – 2927047, 2922613 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
पर्यावरण हितैषी वर्मीकम्पोस्ट से कृषक कल्याण का सपना हो रहा साकार
