श्रीमद् भागवत कथाः जहाँ ईश्वर के भजन होते हैं वहां आसुरी शक्तियां प्रवेश नहीं कर पाती

फतहनगर। जहाँ ईश्वर के भजन होते हैं वहां आसुरी शक्तियां प्रवेश नहीं कर पाती है। जो कृष्ण नाम की तुलसी माला धारण करते हैं प्रभु स्वयं उनकी रक्षा करते हैं। उक्त उद्गार रविवार को चुण्डावत खेड़ी में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के दौरान कथा प्रवक्ता लालगोविंद प्रभु ने व्यक्त किए।

चुण्डावत परिवार के सौजन्य से चल रहे इस धार्मिक आयोजन में भागवत कथा मार्मज्ञ पूज्य श्री लालगोविंद प्रभु के मुखारविंद से प्रतिदिन दोपहर 1 से 5 बजे तक व्यास पीठ से संगीत मय भागवत कथा का वाचन किया जा रहा है। कथा के छठवें दिन कहा कि कथा सुनते समय कथा में खो जाना चाहिए। मकर संक्रांति के महत्व को बताते हुए कहा कि देवताओं का नववर्ष आज से ही प्रारम्भ होता है। पतंगबाजी प्रसंग में कहा कि पतंग नहीं लोगों के दुःख को काटना चाहिए। अलग अलग राज्यों में मकर संक्रांति को अलग अलग रूप में मनाया जाता है।

उन्होने कहा कि ईश्वर को पाने के लिए सद्गुरु का आश्रय आवश्यक है। गुरु बनाते समय गुरु की जाति नहीं देखते हुए उन्हें परखना चाहिए। गुरु का काम है भटके हुए को रास्ता दिखाना। गुरु गुणों से होता है। जीवन का आधार आहार है इसलिए जैसा खाएंगे अन्न वैसा होगा मन। एक अंधा अंधे को कैसे रास्ता दिखा सकता है। इसलिए जो गुरु राम, कृष्ण, विष्णु के भक्त हो, स्वयं को भगवान नहीं समझने वाले हो, जो कहते है उसका स्वयं पालन जीवन में करते हो, जो सम्प्रदाय से जुड़ा हुआ हो उन्हें ही गुरु बनाना चाहिए।

आज की कथा में पूतना उद्धार प्रसंग, बाल लीला,सकटासूर वध, ब्रज रज महिमा, मां यशोदा को मिट्टी भरे मुख में करोड़ों ब्रम्हांड के दर्शन प्रसंग, माखनचोरी के भाव विभोर करने वाले प्रसंगों के साथ कथा को विश्राम दिया गया। आज कथा आयोजन में पधारने पर नवानिया आश्रम के सतगुरू भेरू महाराज,भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष चंद्रगुप्त सिंह, नगर अध्यक्ष राधेश्याम बागला, द्वारिकाधीश मंदिर कमेटी फतहनगर, समिधा निराश्रित बालगृह टीम एवं अतिथियों का स्वागत सम्मान किया गया। महाआरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया एवं सभी ने महाप्रसादी में भोजन प्रसाद ग्रहण किया।

By Udaipurviews

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