रावण को नहीं हमारे अंदर बैठे रावण को जलाने की आवश्यकता है

फतहनगर। निकटवर्ती चुण्डावत खेड़ी में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन शनिवार को कथा प्रवक्ता लाल गोविंद प्रभु ने विभिन्न प्रसंगों को प्रस्तुत करते हुए कहा कि आज के दुष्ट लोग रावण से भी अधिक दुराचारी हैं। सीताजी के लंका में रहने पर भी रावण ने उनका स्पर्श तक नहीं किया। श्री राम को अपने उद्धार के लिए ही सीताजी का हरण किया था। आज विश्व में चारों तरफ अत्याचार और बलात्कार किये जा रहे हैं। रावण को नहीं हमारे अंदर बैठे रावण को जलाने की आवश्यकता है।

उन्होने कहा कि वेदों में कहा गया है कि घर में भोजन बनने पर पहली रोटी गाय के लिए एवं अंतिम रोटी कुत्ते के लिए होनी चाहिए। पति की इच्छा अनुरूप धर्म के लिए मदद, सहयोग एवं साथ देना पत्नि का कर्तव्य है। अधर्म को रोकने के लिए जहां धर्म आता वहां ईश्वर स्वयं आते हैं। चाणक्य नीति कहती है कि जब विनाश आता है तो बुद्धि भी विपरीत हो जाती है। शिव श्रृंगार बरात एवं विवाह का सुंदर चित्रण, जलन्धर उद्धार, वृन्दा श्राप, नारद श्राप, राम जन्म, केवट के भाग्य का करुणामय वाचन, कंस के अत्याचार एवं कृष्ण जन्म के भावविभोर करने वाले प्रसंगों के साथ कथा को विश्राम दिया गया।

आज कथा आयोजन में मूंगाणा धाम के मेवाड़ महामंडलेश्वर 1008 श्री श्री चेतनदास महाराज के कृपा पात्र महंत श्री अनुजदास महाराज, रणधीरसिंह भींडर, आकोला अखाड़ा के महंत श्री बजरंगदास, भोपालसागर अखाड़ा के महंत श्री मुरलीदास महाराज, मावली वस्त्र व्यापार मण्डल अध्यक्ष निर्मल लोढ़ा एवं अतिथियों का आयोजक परिवार द्वारा स्वागत एवं सम्मान किया गया। शाम को रामादल मावली से पधारे महेश शर्मा एवं दल के सानिध्य में संगीतमय सुंदरकांड पाठ किया गया। महाआरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया एवं सभी ने महाप्रसादी में भोजन प्रसाद ग्रहण किया।

By Udaipurviews

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