8 दिवसीय संस्कार शिविर सम्पन्न,शिविरार्थी बच्चें हुए पुरूस्कृत

विभिन्न वर्गाे में अविश जैन, एकत्व बंडी, विधि जैन, जैनम जैन वर्तिका जैन रहे प्रथम
उदयपुर। कुंद कुंद कहान वीतराग विज्ञान शिक्षण समिति के तत्वावधान एवं धर्म प्रेमी मुमुक्षु स्मृतिशेष श्री कस्तूर चंद सिंघवी के पुनीत स्मरण में सिंघवी परिवार के सहयोग से पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह का कार्यक्रम आयोजित हुआ।
शिविर के निदेशक डॉ जिनेंद्र शास्त्री ने बताया की कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध समाजसेवी डॉक्टर श्याम एस सिंघवी थे। सिंघवी ने कहा कि बच्चों में जो संस्कार का बीजारोपण शिविर के माध्यम से किया जा रहा है वह सराहनीय है और यही उम्र होती है जब बच्चों में संस्कार दिए जाएं ताकि वे बड़े होकर देश व समाज का कार्य कर सकें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उदयपुर शहर विधायक  ताराचंद जैन ने की थी। विशिष्ट अतिथि दिगंबर जैन बीसा नरसिंगपूरा तेरापंथ आमराय समाज के अध्यक्ष योगेश अखावत, लक्ष्मीलाल बण्डी ,रोशनलाल फांदोत,राजमल टीमरवा, डॉक्टर मनीष शास्त्री रहैली,रमेश वालावत, कचरु लाल मेहता,अभय बण्डी,हरीश कोड़िया ,ललित गदिया थे। अतिथि का शब्दों द्वारा स्वागत नरेंद्र दलावत ने किया।
शिविर में 200 से ज्यादा बच्चों ने धर्म शिक्षा एवं संस्कार शिक्षा ग्रहण की। स्कूली शिक्षा के साथ-साथ धर्म और संस्कार की शिक्षा महत्वपूर्ण होती है। इन शिक्षाओं के माध्यम से ही बच्चे आगे चलकर अपना जीवन संवार सकते हैं। शिविर में बच्चों को वीतराग, सच्चे देव, 18 दोषों के नाम, सर्वज्ञ,, हितोपदेशी, जिनवाणी, गुरु, मुनिराज के 28 मूल गुणों के बारे में विस्तार से जानकारियां प्रदान की गई। इसके साथ ही इंद्रियों का ज्ञान, द्रव्य, गुण पर्याय के साथ ही भक्ष्य, अभक्ष्य विचारों के बारे में कक्षाओं में शिक्षकों ने विस्तार से जानकारी दी। समापन अवसर पर बच्चों को अतिथियों द्वारा पुरस्कार एवं सर्टिफिकेट भी प्रदान किए गए।
विधान के समापन के पश्चात रविवार को श्रावक श्राविकाओं से पंडित डॉ मनीष शास्त्री रहली वालों ने सामान्य पूजा करवाई। इस दौरान पंडित जी ने वृद्धि ऋद्धि और सिद्धि के भावों में ज्ञानी और अज्ञानी के बीच की सोच को बताते हुए कहा कि ज्ञानी अपने घट में प्रेम, प्रभु भक्ति, धर्म कोई अपनी संपत्ति मानते हैं। ज्ञानियों को कभी लोग मोह और माया से कोई विराज नहीं होता है। उन्हें तो केवल धर्म आराधना और प्रभु भक्ति में ही आनंद आता है और वही उनके जीवन की मूल संपत्ति होती है। अज्ञानी केवल पैसा और अपना जयकारा लगवाने में ही अपने को धन्य मानते हैं और उसी में अपने जीवन की सफलता समझते हैं।
लखपति, करोड़पति, अरबपति जिन्हें हम आध्यात्मिक तौर पर अज्ञानी कह सकते हैं वह आमतौर पर याचक होते हैं। अपना आत्म सम्मान बेच कर भी अपनी स्वार्थ पूर्ति करने में कोई परहेज नहीं करते हैं। जबकि सम्यक दृष्टि ही मनुष्य को लक्ष्यपति बनाती है। लक्ष्यपति प्रभु के सामने ही याचना करता है।
डॉ. जिनेन्द्र शास्त्री ने बताया कि शिशु वर्ग-1 में अविश जैन प्रथम,जश जैन द्वितीय,मोक्षा ततीय रहे। शिशु वर्ग 2 में एकत्व बंडी प्रथम, दृष्टि जैन द्वितीय,जेनिल तृतीय, बाल वर्ग-1 में विधि जैन प्रथम,ऋषिका जैन द्वितीय,हिति कोठारी तृतीय, बाल वर्ग-2 में जैनम जैन प्रथम,परिणति जैन द्वितीय,संजय जैन तृतीय, किशोर वर्ग में वर्तिका जैन प्रथम, जेनिका जैन द्वितीय, हिमान जैन तृतीय रहे।
समापन समारोह के पश्चात शिविर स्थल से श्रीजी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। बैंड बाजों के साथ विशेष रथ में श्रीजी  की पालकी सजाई गई। हिरण मगरी सेक्टर 4 के विभिन्न मार्गाे से होते हुए सैकड़ो श्रद्धालुओं के साथ पूर्ण भक्ति भाव से करीब ढाई किलोमीटर की जयकारों के साथ निकली शोभायात्रा का समापन जिन मंदिर में हुआ।
शिविर का परिचय पं. ऋषभ कुमार जैन शास्त्री ने दिया। पुरस्कार की घोषणा पं खेमचंद शास्त्री ने की,शिविर की उपलब्धि की जानकारी डॉ. अंकित जैन शास्त्री, आगामी शिविर की योजना के बारें में डॉ. महावीर प्रसाद जैन ने वक्तव्य दिया। संचालन शिविर के निदेशक डॉ जिनेंद्र शास्त्री ने किया वही धन्यवाद समिति के उपाध्यक्ष भावेश कालिका ने दिया।

By Udaipurviews

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