नए साल पर समाज सेवा के साथ खुद के लिए भी लें संकल्प-मुकेश माधवानी

उदयपुर। शहर के प्रमुख उद्योगपति और समाजसेवी मुकेश माधवानी ने नए साल में खुद के सकारात्मक बदलाव हेतु संकल्प लेने की बात कहीं है। उन्होंने कहा कि इस नए साल में हमें औरों के जीवन में सेवा के माध्यम से बदलाव के साथ खुद का जीवन भी कुछ संकल्पों से बदलना होगा।
वे आज अशोका ग्रीन में रोटरी क्लब अशोका की आयोजित बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारी दिनचर्या में थोड़ा-सा व आसान परिवर्तन हमें स्वस्थ व दीर्घायु बना सकता है। बशर्ते आप नए साल में आप कुछ चीजों को अपना लें और कुछ चीजों को हमेशा के लिए दूर कर दें।
माधवानी ने कहा कि नए साल में देर से जागने की इस बुरी आदत को बदलना होगा। प्रतिदिन प्रातः सूर्याेदय से पूर्व उठकर दो या तीन कि.मी. घूमने जाएं। सुबह आठ बजे से पहले स्नान कर सूर्य आराधना से दिन का आरंभ करें। ऐसा करने से आपके अंदर एक शक्ति जागृत होगी जो दिल-दिमाग को ताजगी देगी और आप अपने सभी कार्यों को सही ढंग से एवं समय पर कर पाएंगे।
उन्होंने कहा कि हमें नये वर्ष मे ंजंक फूड खाने की आदत को भी बदल कर सिर्फ घर के बने हुए भोजन को ही खानें पर जोर देना होगा।इससे आपके बीमार होने की आशंका बहुत कम हो जाएगी। वहीं, बाहर के खाने पर जो पैसा बचेगा,उसे सूखे मेवे और फल खाने में खर्च करें। शाकाहार भोजन स्वास्थ्यवर्धक होता है अतः शाकाहार भोजन से ही स्वास्थ्य बनाने का प्रयास करें। भोजन हमेशा खूब चबा-चबाकर आनंदपूर्वक करें ताकि पाचनक्रिया ठीक रहे, इससे कोई भी समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी।
माधवानी ने कहा कि प्रतिदिन हल्का व्यायाम एवं वॉक अवश्य करें। नए साल में प्रतिदिन वॉक और हल्का व्यायाम अवश्य करें। जहां तक हो कम दूरी के लिए पैदल जाएं। इससे मांसपेशियों का व्यायाम होगा, जिससे आप निरोगी रहकर आकर्षक बने रहेंगे, साथ ही पर्यावरण की रक्षा में भी सहायक होंगे।
माधवानी ने कहा कि किताबों को जीवन में उतारें क्योंकि किताबें इंसान की सबसे अच्छी मित्र होती हैं। उनसे अर्जित ज्ञान कभी भी व्यर्थ नहीं जाता।किताबें ज्ञान का अकूत भंडार होती हैं ये व्यक्ति को रचनाशील एवं संवेदनशील बनाती हैं जिसके कारण हमारी सोचने-समझने की शक्ति बढ़ जाती है,बौद्धिक क्षमता तेज होती है और हमारे अंदर लोगों के प्रति सहानभूति का विकास होता है।
उन्होंने कहा कि क्रोध आना हर एक मनुष्य की स्वाभाविक वृत्ति है, लेकिन क्रोध कभी -कभी हमारे दिलो -दिमाग पर इतना हावी हो जाता है कि वह हमारें लिये काफी नुकसान कर बैठता है।  सच्चाई तो यह है कि गुस्से से किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता है। इस अवसर पर क्लब सदस्यों ने भी अपने विचार साझा किये।

By Udaipurviews

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