बच्चे संस्कार शिविर में धार्मिक शिक्षा सीख कर जीवन में उतार रहे

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर। श्री कुंद कुंद कहान वीतराग विज्ञान शिक्षण समिति श्री वर्धमान जैन श्रवण संस्थान की और से हिरणमगरी सेक्टर 4 में चल रहे संस्कार शिक्षण शिविर एवं विधान में श्रद्धालु रोजाना धर्म लाभ ले रहे हैं। शिविर में जहां बच्चों को धर्म की शिक्षा दी जा रही है वहीं विधान में श्रावक श्राविकाए विधान में आहुतियां देकर अपने मनुष्य जीवन को सफल बना रहे हैं।
शिविर निदेशक डॉ. जिनेन्द्र शास्त्री ने बताया कि शिविर में बच्चों ने शिक्षकों विद्वानों से ऐसे ऐसे प्रश्न पूछे कि वह भी चकित हो गये। एक बार तो उन्हें भी सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि ऐसे प्रश्न बच्चों के दिमाग में आये कैसे। इससे पता चलता है कि बच्चे संस्कार शिविर में केवल सीख ही नहीं रहे हैं बल्कि उन्हें जीवन में भी उतार रहे हैं।
शिविर में बच्चों को शिक्षकों ने विभिन्न इंद्रियों का ज्ञान करते हुए बताएं कि आत्मा का ज्ञान करने में शरीर के जो चिन्ह सहायक होते हैं उन्हें इंद्रियां कहते हैं इंद्रिय पांच प्रकार की होती है स्पर्श, रसना, घ्राण, चक्षु और कर्ण। इन पांचो इंद्रियों के बारे में शिक्षकों ने बच्चों को विस्तार से बताया। केंद्रीय ज्ञान से आत्मा का ज्ञान नहीं होता है। यह पांचो इंद्रियां पुद्गल का ही ज्ञान करती है। आत्मा का हित तो आत्मा को जानने में ही है। अतः इंद्रिय ज्ञान तुच्छ है। दो दिवसीय अष्ट पाहुड मंडल विधान प्रारंभ हुआ। विधान में पण्डित जी ने अर्घ्य समर्पण करवाने के साथ ही आहूतिया दिलवाई।
पंडित डॉ. मनीष शास्त्री, पंडित अंकुर शास्त्री, पंडित एवं पंडित आशीष शास्त्री के सानिध्य हो रहे विधान में पंडितजी ने उपस्थित श्रावकों से कहा कि गणधर के बिना हम भगवान की वाणी नहीं सुन सकते। जैसे मोबाईल पर जब हम बात करते हैं। हम समझते हैं कि हम सामने वाले से सीधी बात कर रहे हैं लेकिन ऐसा होता नहीं है। क्योंकि बीच में अगर टावर नहीं होंगे तो हम सामने वाले से बात ही नहीं कर सकते हैं। घर में जिनवाणी होना चाहिए। यही नहीं घर में एक स्वाध्याय भवन भी होना चाहिए। जब हम बच्चों को सिखाते हैं कि पानी छानकर पीना चाहिए तो उन्हें यह भी समझाना होगा कि पानी कैसे छाना जाता है। जीवन में स्वस्थ और सुखी रहना है तो हमें अपना आहार शुद्ध रखना होगा।

By Udaipurviews

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