उदयपुर। व्यवसाय एवं निजी कार्य के लिए उधार ली राशि के बदले दिया गया चैक बैंक से अपर्याप्त राशि के कारण अनादरित होने पर अदालत ने आरोपी को एक वर्ष का कारावास व 3.20 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
प्रकरण के अनुसार पालीवालों का मोहल्ला ओरड़ी मावली निवासी मोहन पुत्र गणेशलाल पालीवाल ने नोहरा खेमली निवासी खूबीलाल पालीवाल के खिलाफ अधिवक्ता लोकेश जैन के जरिए गत 16 अगस्त 2013 को परिवाद पेश किया जिसमें बताया कि आरोपी खूबीलाल ने जान पहचान होने के कारण निजी एवं व्यवसायिक कार्य के लिए दो लाख रुपए उधार लिए उसकी एवज में15 मार्च 2013 का बैंक का चैक दिया। चैक भुगतान के लिए बैंक में पेश किया तो 14 जून 2013 को अपर्याप्त राशि के अभाव में अनादरित हो गया। इस पर फरियादी के अधिवक्ता ने 19 जुलाई 2013 को नोटिस दिया जिसे उसने जान-बूझकर लौटा दिया। इस पर फरियादी की ओर से पेश परिवाद पर अदालत ने 8 अक्टूबर 2013 को पं्रसज्ञान लिया। मामले में दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट (ूएनआई एक्ट केसेज) क्रम-6 के पीठासीन अधिकारी दीपेंद्र सिंह शेखावत ने अभियुक्त खूबीलाल को दोषी करार देते हुए एनआई एक्ट 1881 की धारा 138 में एक वर्ष का कारावास व तीन लाख 20 हजार रुपए जर्माने की सजा सुनाई।
चैक अनादरण के आरोपी को एक साल की कैद
