ब्रेन ड्रेन वर्सेस रिवर्स ब्रेन ड्रेन – विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का हुआ आयेाजन
युवा वर्ग कुछ हट कर कार्य कर अपनी प्रतिभा को निखारे – प्रो. सारंगदेवोत
उदयपुर 30 सितम्बर / जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय के संघटक प्रबंध अध्ययन संस्थान की ओर से ब्रेन ड्रेन वर्सेस रिवर्स ब्रेन ड्रेन विषय पर आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रवक्ता प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा कि भारत में ब्रेन ड्रेन को रोकने के लिए अच्छी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ ही क्वालिटी ऑफ लाइफ और अच्छे नौकरी के पैकेज देने पड़ेंगे। उच्च शिक्षा में रिसर्च के बेहतर अवसर देने होंगे। दुनिया के एजुकेशन सिस्टम को केवल प्रेक्टिस ही आती है, हमको थ्योरी आती है, इसका भी हमें बडा फायदा है। हमें नए इनोवेशन भी देने हैं, कॉपीराइट्स भी कराने हैं, ट्रेड मार्क भी कराने हैं। हमारा अपना पेटेंट करवाने का कल्चर होना चाहिए। जब वो वक्त आ जाएगा कि प्रोफेसर्स खुद 300 से 400 पेटेंट करवाना शुरू कर देंगे, प्रोफेसर्स मैनेजमेंट के नए कांसेप्ट दुनिया को देना शुरू कर देंगे, उस दिन भारत से ब्रेन ड्रेन होना खत्म हो जाएगा। उन्होंने बताया कि भारत के साढे 9 लाख बच्चे अमेरिका में सेवाएं दे रहे हैं। यूके, यूएई, कैनेडा, ऑस्ट्रलिया में भी सेवाएं दे रहे हैं क्योंकि उनके पास भारत के अवसरों से बेहतर अवसर, पैकेज और काम करने के मौके है। गौरव वल्लभ ने कहा कि मैंने सीबीएसई के 10वीं और 12वीं के पहले 20 विद्यार्थियों की लिस्ट बनाई व पता लगाया कि आजकल ये बच्चे कहां काम कर रहे हैं। मुझे पता चला कि 90 प्रतिशत बच्चे भारत से बाहर सेवाएं दे रहे हैं। उनमें से 80 प्रतिशत अमेरिका में सेवाएं दे रहे हैं। जबकि 14 साल में अमेरिका गए तो साढे 9 लाख मगर वहां से साढे 9 हजार भी भारत जॉब करने नहीं आए। उन्होंने कहा कि बढती हुई अर्थ व्यवस्थाएं अपने लोगों में इन्वेस्ट करती हैं। यह दुखद है कि भारत में कर दाताओं के पैसों से पढाई पूरी करते ही यहां के शॉर्प ब्रेन विदेश चले गए। भारत का एजुकेशन सिस्टम थ्योरी डोमिनेशन बहुत ज्यादा हो गया है। हमें रिसर्च और इनोवेशन का एनवायरमेंट बनाना पडेगा। माइक्रो स्पेशलाइजेशन के कोर्स शुरू करने चाहिए। प्रोफेसर गौरव ने बताया कि जब डवलप्ड नेशन के लोग अंडर डवलप्ड देशों में आकर काम करते हैं तो उसे हम रिवर्स ब्रेन ड्रेन कहते हैं। हमारे यहां सिक्योर मीटर, हिन्दुस्तान जिंक आदि में विदेशी सीईओ आकर काम कर रहे हैं, यह रिवर्स ब्रेन ड्रेन है। प्रो गौरव बोले कि आपको यह जानकर अचरज होगा कि यूएएस में आधे से ज्यादा विश्वविद्यालय नॉन टीचिंग हैं। वहां कोई बच्चा पढने नहीं आता। वहां के प्रोफेेसर्स केवल रिसर्च करते हैं। रिसर्च को भी सालों तक सरकारी व निजी स्तर पर बिना परिणामों की परवाह किए फंड किया जाता है। प्रोफेसर गौरव ने नई शिक्षा नीति की तारीफ की व कहा कि इसमें अब प्रेक्टिकल ओरिएंटेशन को बढावा देने का प्रयास किया है। पहले अलग-अलग संकायों के विषयों को साथ लेकर अध्ययन करने का विकल्प नहीं था। नई शिक्षा नीति ने उस बोटल नेक को तोडने का भी प्रयास किया है। नेशनल इनोवेशन फंड बनाकर रिसर्च को फंडिंग करने का भी प्रयास हुआ है।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि जो लोग कुछ हट कर काम करते हैं वो देश दुनिया में हमेशा हट कर नजर आते हैं। भारत लगातार बदल रहा है और यहां के लोगों का लोहा दुनिया मान रही है। देश में ही कुछ कमियों को दूर करके प्रतिभाओं का पलायन साझा प्रयासों से रोका जा सकता है।
मुख्य अतिथि भंवर लाल गुर्जर ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रतिभा पलायन पूरे देश के लिए चिंता का विषय है इसे रोकने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।
संचालन प्रो. मंजू मांडोत ने किया।
इस अवसर पर डॉ. रचना राठौड़, डॉ. सुनिता मुर्डिया, डॉ. अमी राठौड़, डॉ. हीना खान, डॉ. नीरू राठौड़, डॉ. मनीष श्रीमाली, डॉ. भारत सिंह देवड़ा, डॉ. गौरव गर्ग, डॉ. गुणबाला आमेटा, भगवती लाल सोनी सहित अकादमिक कार्यकर्ता एवं विधार्थी उपस्थित थे।
