रामकथा का आज अंतिम दिन
उदयपुर 3 अगस्त। व्यास पीठ से बोलतें हुए कथावाचक साध्वी श्री विश्वेश्वरी देवी ने कहा कि जो भगवान को सहयोग नहीं करता उसको जगत में कोई भी सहयोग नहीं करता। यह इसी का ही परिणाम है कि इन्द्र पुत्र जयंत ने कुदृष्टि एवं विचारों के कारण माता श्री सीता जी के चरण में चाँच का प्रहार किया। तो भगवान ने उस पर तीर छोड़ दिया। जिसके कारण वह लोक में भटकता रहा किन्तु किसी ने भी उसका सहयोग नहीं किया। साध्वी जी ने कहा कि जो भगवान का अपराधी होता है उसे तो भगवान क्षमा कर देते हैं किन्तु जो उनके भक्तों का या का अपमान करता है ,वह भगवान के द्वारा दंडित किया जाता है। इसीलिए जयंत को भी भगवान ने दंडित किया।
वे अंबापोल स्थित पुष्प वाटिका में चल रही श्री राम कथा के आठवें दिन जटायु पं्रसग सुना रहीं थी। साध्वी विश्वेश्वरी देवी ने कहा कि इसके वनागमन के दौरान आगे की लीलाओं को पूर्ण करने के लिए भगवान संतों के आश्रमों में दर्शन देते हुए पंचवटी पर पहुंचे। यहां सुर्पणखा के कारनामों के कारण लक्ष्मण जी द्वारा दंडित किया गया। सुर्पणखा दुर्भावना की प्रतीक है। उसे दंडित करके ही मिटाया जा सकता है। रावण द्वारा श्री जानकी जी माता का हरण एवं जटायु जी के द्वारा उनकी रक्षा करते हुए मरणासन्न स्थिति को प्राप्त होना यह घटना हमारी संस्कृति में अजर अमर है। घटना से हमें यह सीख मिलती है कि अपने धर्म, संस्कृति, संस्कारों एवं नारी के सम्मान की रक्षा करते समय यदि हमारे प्राण भी चले जाएं तो भी पीछे नहीं हटना चाहिए। अन्त में भगवान के द्वारा जटायू जी को पूर्ण प्रेम एवं आदर प्राप्त हुआ। रामायण काल की यह महान घटना यही दर्शाती है कि जो धर्म के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देते हैं वही भगवान के विशेष और करीब होते हैं। माता सबरी जी को भगवान ने भक्ति का उपदेश दिया। शबरी के झूठे बेर खाकर भगवान ने भक्ति का तो अद्भुद संदेश दिया है साथ में सारी दुनिया को यह पाठ पढ़ाया कि भगवान की भक्ति करने का हर एक को समान अधिकार होता है। किसी भी जाति, धर्म समुदाय और कुल में जन्म लेने वाला व्यक्ति भगवान की भक्ति कर सकता है।
किष्किन्धा में श्री राम और हनुमान जी का आत्मीय मिलन जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। जीवन के कष्टों को मिटाने के लिए भगवान से सम्बन्ध जरूरी है। प्रभु की सेवा करने का सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता क्योंकि सुग्रीव ने श्रीसीता जी की खोज के लिए समस्त वानरों को भेजा। किन्तु श्री हनुमान जी को ही भगवान की सेवा और कृपा प्राप्त हुई और जिससे उन्होंने ही माता श्रीसीता जी की खोज की। धार्मिक सत्संग समिति के अध्यक्ष अनिल शर्मा एवं कमलेश पारीक ने बताया कि भगवान के पंचवटी गमन, सीता हरण एवं जटायु प्रसंग को श्रोताओं ने बड़ी तन्मयता एवं गंभीरता से सुना। जटायु प्रसंग को सुनने के दौरान कई महिला श्रद्धालु भावुक हो गईं। शुक्रवार को रामकथा का अंतिम दिन है।
भगवान को सहयोग नहीं करता उसको जगत में कोई भी सहयोग नहीं करता
