राम जन्मोत्सव में खुशी के मारें छलक पड़ी श्रद्धालुओं की आंखें

जीव जब सच्चे हृदय से प्रार्थना करता है तो भगवान भी उसे सम्यक फल प्रदान करते
उदयपुर। अंबापोल स्थित पुष्प वाटिका में चल रही प्रभु श्री राम की नौ दिवसीय भव्य संगीतमयी श्रीराम कथा के तीसरे दिन राम भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। आज साध्वीश्री विश्वेश्वरी देवी ने राम जन्मोत्सव की कथा सुनायी तो श्रद्धालुओं और विशेषकर महिलाओं की अंाखों से खुशी के अश्रु छलक पड़ें।
धार्मिक सत्संग समिति के अध्यक्ष अनिल शर्मा एवं कमलेश पारीक ने बताया कि कथा स्थल पर खासकर युवाओं सहित महिला एवं पुरुष भक्त आस्था और श्रद्धा के साथ साध्वीश्री विश्वेश्वरी देवी की मधुर एवं संगीतमय वाणी को सुनकर राममयी हो रहे हैं। राम जन्मोत्सव प्रसंग में कथा स्थल पर ऐसा दृश्य उपस्थित हुआ मानो अयोध्यापुरी स्वयं कथा स्थल पर उदयपुर में भक्तों को दर्शन देने पधारी हो। राम जन्मोत्सव के प्रसंग को सुनने के लिए श्रद्धालु समय से पूर्व ही पांडाल में पहुंच गए। खास बात यह रही कि महिला एवं पुरुष श्रद्धालु राम भक्त कथा प्रारंभ से लेकर कथा समापन तक भक्ति में डूब कर झूमते रहे।
साध्वी श्री विश्वेश्वरी देवी जी ने श्री राम जन्मोत्सव का प्रसंग शिव पार्वती विवाह के प्रसंग से शुभारंभ करते हुए कहा कि पार्वती जी की एक निष्ठा एवं कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने विवाह का वचन दिया। जीव जब सच्चे हृदय से प्रार्थना करता है तो भगवान भी उसे सम्यक फल प्रदान करते हैं। भोगी की प्रारम्भिक अवस्था सुखमय प्रतीत होती है, किन्तु अन्त अत्यन्त दुखद होता है। इसके ठीक विपरीत योगी की साधना अवस्था कष्टप्रद होती है किन्तु अंत बड़ा सुखद होता है। इसलिए कहा जाता है, ष्अन्त भला तो सब भला ।
शिव पार्वती विवाह में भूत प्रेतों को भी शामिल किया गया है, जो शिव की समता का दर्शन कराता है। विवि का अत्यन्त मनोरम वर्णन करते हुए साध्वी जी ने कहा कि शिव पार्वती जी साक्षात शक्ति और शक्तिमान है। लीला मात्र के लिए वह दोनों अलग-अलग रूपों में नजर आते हैं किन्तु अर्ध नारीश्वर रूप में दोनों एक ही हैं। शक्ति और शक्तिमान के पाणिग्रहण से कुमार कार्तिक का जन्म होता है जो तारकासुर का अन्त करते हैं। तारकासुर समाज के अनाचार एवं अधर्म का प्रतीक है और कुमार कार्तिक सद्गुणों का प्रतीक हैं। जब सद्गुण बलवति होते हैं तो बड़े से बड़े अवगुण को भी नष्ट कर देते हैं। शिव पार्वती प्रसंग के माध्यम से श्री रामकथा का प्रारंभ कैलाश की पावन भूमि पर हुआ। पार्वती जी ने शिवजी से राम चरित्र विषयक कुछ प्रश्न पूछे और शंकर जी ने उनका उत्तर देते हुए श्रीराम कथा प्रारम्भ की।
प्रत्येक कल्प में भगवान का श्रीरामावतार होता है। पांच कल्पों की कथा मानस में है। अधर्म रूप रावण के अन्त के लिए एवं संतों भक्तों व प्रेमियों को आनन्द देने के लिए भगवान अवतार लेकर आते हैं। हमारा मन ही अयोध्या है, जब मन में प्रेम और भक्तों की धारा प्रवाहित होने लगती है तो भगवान निराकार से साकार हो जाते हैं। त्रेता युग में चैत्र शुल्क पक्ष नवमी के दिन भगवान का अवतार महाराज दशरथ एवं माता कौशल्या के राज भवन में हुआ। मीडिया प्रभारी नीरज सनाढ्य ने बताया कि भगवान के जन्मोत्सव पर समस्त श्रद्धालुओं ने एक दूसरे को बधाई दी एवं आनंद के साथ श्री रामलला का दर्शन करते हुए नृत्य किया। रविवार को राम विवाह की झंाकी सजाकर उनका वर्णन किया जायेगा।

By Udaipurviews

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