निरंतर  चलायें जाए एयरेटर – फोल्टिंग फव्वारे 

उदयपुर, 9 जुलाई,    रविवार को आयोजित झील संवाद मे   झील प्रेमियों ने आशंका जताई है कि   बरसाती काल मे  मछलियों की मौत  हो सकती है।    झील संरक्षण समिति के डॉ अनिल मेहता ने कहा कि जल ग्रहण क्षेत्रों की  गंदगी, कार्बनिक पदार्थों के  झीलों मे प्रवेश व निरंतर बादलों के छाए रहने  से   झीलों  मे ऑक्सीजन कम हो सकती  है  । ऐसे मे  मछलियाँ  मर जाती है। जरूरी है कि  निरंतर एयरेटर, फोल्टिंग फव्वारे चलाकर  पानी मे ऑक्सीजन की निर्धारित मात्रा बनाई रखी जाए।
झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि उदयपुर शहर व आयड नदी के किनारें बसे गाँवों की गंदगी बह कर उदयसागर पंहुच रही है। अत: उदयसागर की मछलियों पर सर्वाधिक खतरा है।   गाँधी मानव कल्याण समिति के निदेशक नंद किशोर शर्मा ने कहा कि गत माह हुई मछलियों की मौत से सबक लेना चाहिए।  मत्स्य विभाग तथा प्रदूषण नियंत्रण मंडल को   प्रतिदिन  झीलों की निगरानी करनी चाहिए।
झील प्रेमी कुशल रावल तथा द्रुपद सिंह ने कहा कि झीलों के किनारों , घाटों से भी कुछ लोग कचरे, गंदगी का विसर्जन कर रहे है। इससे भी झीलों मे घुलनशील  ऑक्सीजन   की  कमी हो जाती है। इसे रोकना होगा। संवाद से पूर्व  श्रमदान  कर झील सतह पर तैर रहे कचरे को हटाया गया।
By Udaipurviews

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