आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज का चातुर्मास की कलश स्थापना बड़े धूमधाम से हुई

वर्षायोग कलश स्थापना आज, 5 माह धर्म की गंगा बहाई जायेगी।
जिसने अहिंसा धर्म को समझा वह जीव दया को समझ गया।
उदयपुर। 18 जुलाई रविवार हुमड़ जैन भवन में  वर्षा योग कलश स्थापना आचार्य वर्धमान सागर जी के सानिध्य में होगी। प्रचार प्रसार मंत्री पारस चित्तौड़ा ने बताया कि रविवार को चातुर्मास वर्षा कलश स्थापना के अवसर पर यह मिलन ऐतिहासिक होगा। बाहर से भी श्रावक- श्राविकाएं वर्षायोग कलश स्थापना अवसर पर धार्मिक आयोजनों में शामिल होने के लिए हुमड़ भवन आये हैं जिनके आवास एवं भोजन की व्यवस्था भी की गई है।
रविवार  को आचार्य श्री ने अपने मंगलमय उद्बोधन में वर्षा योग कलश स्थापना एवं अहिंसा धर्म के बारे में बताया। आपने कहा कि विश्व के जितने दर्शन हैं अहिंसा के बाहर कोई नहीं है। सभी का एकमात्र सूत्र अहिंसा परमो धर्म है और जिस ने अहिंसा धर्म समझ लिया उसके अंदर जीव दया का भाव स्वता ही आ गया। भारत की वसुंधरा इन संत और महंतों के कारण बहुत ही पुण्य शाली एवं पवित्र है। तपोस्थली भारत भूमि पर विचरण करते हुए संत महंत जहां भी अपने चरण कमलों को रखते हैं वहां माटी चंदन बन जाती है तथा भूमि एक पवित्र तीर्थ का रूप ले लेती है। वह धरा वंदनीय हो जाती है हर प्राणी चरण रज को अपने मस्तिष्क पर बड़ी श्रद्धा के साथ रखता है। धन्य है ऐसी धरती जहां पर इन संतों ने जन्म लिया। धन्य है वह देश जो इनकी त्याग और तपस्या से फलीभूत हो रहा है।
श्रावण मास में धर्म श्रवण कर साधु बनने की साधना करें, भाद्र मास में भगवान की भक्ति कर अंदर में क्षमता लाएं। आषाढ़ मास में आलस्य छोड़कर आत्म तत्व को जानने एवं कार्तिक माह में कर्तव्यों का निर्वाह करें। यही चातुर्मास का महत्व है। वर्षायोग सुख के बीजारोपण का शुभ अवसर है। यदि आए अवसर चूक गए तो जैसे आषाढ़ का चूका किसान, दाल का चूका बंदर बरसो बरसो पछताता है। वैसे ही आपको भी कई जन्मों तक पछताना होगा। समय निकलने से पहले हमें पाप पंख से निकल कर साधुओं के चरणों में आ जाना चाहिए। पांडाल उद्घाटन करता श्रीमान जनक राज स़ोनी, झंडारोहण करता सुमति लालजी राठिया, स्वागत उधबोधन शान्ति लाल वेलावत, दीप प्रज्वलन सुरेश चंद्र पद्मावत।
विषेश अतिथि पारस सिंघवी उप महापौर, आर के डीरेक्टर विमल पाटनी, प्रमोद चोधरी, आशीष जी कीशनगढ, राकेश सेठी कलकत्ता,  अशोक जी बेगलुर पादपक्षालन, नरेन्द्र जी महावीर जी डोटिया शास्त्र भेट कवरीलाल जी अशोक जी पाटनी, कलश स्थापना पण्डित जवाहरलाल जी शास्त्री जैन भीण्डर।तारीका जी पाटनी ने गुरु जी पुजन अष्ट द्रव्य से पुजन भक्ति की।
By Udaipurviews

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