मातृ शक्ति ने राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को सौपा ज्ञापन
उदयपुर, 27 अप्रैल। समलैंगिक विवाह को न्याय पालिका द्वारा वैध घोषित नही किये जाने पर कि मांग को लेकर मातृशक्ति उदयपुर में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौपा। सर्व समाज से मातृशक्ति की ओर से दिए गए ज्ञापन में बताया भारत देश आज सामाजिक आर्थिक क्षेत्रों के अनेक चुनोतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में समलैंगिक विवाह के अधिकार विषयांतर्गत विषय को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुनने एवं निर्णीत करने की कोई गंभीर आवश्यकता नहीं है।
ज्ञापन में बताया कि भारत विभिन्न धर्मों जातियों, उप जातियों का देश है। इसमें शताब्दियों से केवल जैविक पुरुष एवं जैविक महिला के मध्य विवाह को ही मान्यता दी है। विवाह की संस्था न केवल दो भी समलैंगिकों का मिलन है बल्कि मानव जाति की उन्नति भी है सभी धर्मों में केवल विपरीत लिंग के दो व्यक्तियों के विवाह का उल्लेख है विवाह को दो अलग अलग लैंगिकों के पवित्र मिलन के रूप में मान्यता देते हुए भारत का समाज विकसित हुआ है।
ज्ञापन में बताया कि स्वतंत्र भारत में सांस्कृतिक जड़ों पर पश्चिमी विचारों, दर्शनों एवं प्रथाओं के अधि रोपण का सामना करना पड़ रहा है जो इस राष्ट्र के लिए व्यावहारिक नहीं है ज्ञापन में उक्त विषय पर सभी हितबद्ध व्यक्तियों, संस्थाओं से परामर्श करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने तथा यह सुनिश्चित करने का प्रयास किए जाने के साथ ही समलैंगिक विवाह न्यायपालिका द्वारा वैध घोषित नहीं किए जाने की मांग की गई है।
सर्व समाज के प्रतिनिधि मंडल में वंदना उदावत, संगीता वर्डिया, रेखा जैन, मंजू सेन, तारा मोची, वर्षा कुमावत, मंजू शर्मा, शशि अग्रवाल, सरिता भादविया , करुणा माण्डावत, कुसुम बोरदिया, सरला गुप्ता, धरा गुप्ता, कविता जोशी, मिना भारती, कुसुम पंवार, भावना नागदा, बीना वर्डिया, सुषमा कुमावत, रानू भटनागर, रजनी डांगी, नीरजा रोजर्स, रूपम नलवाया, प्रिया खंडेलवाल, शारदा कलाल आदि उपस्थित थे।
