– घर पहुंचने पर जेठ ने अभद्रता कर बाहर निकाला
थाने पहुंची तो पुलिस ने जेठ को बुलाकर समझौते को बोला तो पुलिस अधीक्षक से की जांच की गुहार और बताया कि अवैध रूप से पैतृक मकान अपने नाम कराया, पति, दिवंगत बेटे के बच्चों तथा बहन की सहमति के बिना पिता का मकान करा लिया अपने नाम
उदयपुर। उदयपुर मूल की मुम्बई में रह रही उदयपुर मूल की एक महिला जब अपने पति की मौत के डेढ़ साल बाद पैतृक मकान का हिस्सा लेने पहुंची तो पता चला कि उक्त मकान उसके जेठ ने अपने नाम करा लिया। जबकि पैतृक संपत्ति में जेठ के अलावा उनके पति, दिवंगत एक अन्य बेटे के बच्चों के साथ एक बहन का भी बंट होना चाहिए था। हाउसिंग बोर्ड के एक मकान को अवैध दस्तावेजों के जरिए जेठ ने अपने नाम कराए जाने की शिकायत हिरणमगरी थाना पुलिस को दी तो पुलिस ने कार्रवाई करने की बजाय आरोपी जेठ को थाने पर बुलाकर उल्टा समझौते के लिए दबाव बनाया। पीड़ित महिला का कहना है कि ससुर ने अपने जीवनकाल में ही मकान का एक हिस्सा उन्हें दे दिया था लेकिन पति के कारोबार के चलते उन्हें बेटियों को साथ लेकर उदयपुर छोड़ना पड़ा और जब वह अपने मकान पर पहुंची तो जेठ ना अभद्रता पूर्वक घर से बाहर ही नहीं निकाला बल्कि दोबारा आने पर सबक सिखाने की धमकी भी दी।
ऐसे में अपनी दो बेटियों के मुम्बई में किराए के मकान में रह रही पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक के यहां गुहार लगाई है। पीड़िता अनिता सनाढ्य ने पुलिस अधीक्षक विकाश शर्मा को लिखित शिकायत में बताया कि उनके ससुर लक्ष्मीनारायण सनाढ्य के नाम हिरणमगरी सेक्टर पांच में हाउसिंग बोर्ड की ओर से 2 ख 43 नंबर का मकान दो दशक पहले निकला था। इस मकान की किश्तें चुकाने में उनके पति सत्यनारायण का आर्थिक सहयोग रहा। ससुर लक्ष्मीनारायण सनाढ़य का 2 दिसम्बर 13 में पति सत्यनारायण का 30 अक्टूबर 2021 में निधन हो गया था। इस मकान के एक हिस्सा मेरे ससुर ने मुझे प्रदान कर रखा था लेकिन कारोबार के चलते मैं अपने पति और बच्चों सहित मुम्बई चली गई थी। वहीं पति का निधन हुआ और जब वह मैं अपने बच्चों को लेकर अपने ससुर के मकान पर आई तो मेरे जेठ राजेंन्द्र प्रसाद सनाढ्य ने ना केवल मुझे घर में घुसने से रोका, बल्कि मेरे साथ अभ्रदता भी की। उन्होंने कहा कि यह मकान उन्होंने अपने नाम करा लिया तथा आइंदा आने पर सबक सिखाने तक की धमकी दी। इस मामले में अपने स्तर पर जांच कराई तो पता चला कि जेठ राजेंद्र प्रसाद ने अवैध दस्तावेजों के जरिए मकान अपने नाम करा लिया। इसकी शिकायत 17 फरवरी को हिरणमगरी थाने में की थी लेकिन हिरणमगरी थाने में मौजूद पुलिस अधिकारी ने मामला दर्ज करने की बजाय राजेंद्र प्रसाद को थाने पर बुलाकर समझौते का दबाव बनाया। पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा का इस मामले में कहना है निष्पक्ष जांच कराकर पीड़िता को राहत प्रदान कराई जाएगी।
बताया कि किस तरह ‘बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ’ आंदोलन को लगा रहे पलीता
पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा को बताया कि उनके जेठ यूं तो एक ऐसे सामाजिक संगठन से जुड़े हैं जो ‘बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ’ अभियान के लिए देश भर ही नहीं, बल्कि विश्व भर में काम कर रहा है। जबकि उनके छोटे भाई की दो बच्चियों के हक मारकर बैठा है। इस संबंध में उन्होंने उस संगठन के प्रांतीय स्तर के पदाधिकारी से भी शिकायत की है।
