गुजराती-राजस्थानी गीतों पर जमकर थिरके विद्यार्थी
गरबा और डांडिया की मनमोहक प्रस्तुतियों ने बांधा समां,
भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का दिया संदेश
उदयपुर, 16 अक्टूबर। राजस्थान विद्यापीठ, प्रतापनगर परिसर में आयोजित डांडिया महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को पारंपरिक उल्लास, सांस्कृतिक रंगों और भक्तिमय वातावरण के बीच विद्यार्थियों ने गरबा और डांडिया की शानदार प्रस्तुतियां देकर समां बांध दिया। गुजराती और राजस्थानी लोकगीतों की मधुर धुनों पर पारंपरिक परिधानों में सजे विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे परिसर में उत्सव का माहौल नजर आया। निर्णायक की भूमिका प्रो. हेमेन्द्र चौधरी, डॉ. दिलिप सिंह चौहान, डॉ. लीली जैन ने निभाई।
महोत्सव का शुभारंभ कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर एवं कुलपति प्रो. मंजू मांडोत ने मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर किया। आयोजन में गैर अकादमिक एवं अकादमिक संकाय सदस्यों के साथ कम्प्यूटर, प्रबंध अध्ययन संस्थान, सोशल वर्क, कन्या महाविद्यालय, योग विभाग एवं टूरिज्म विभाग के छात्र-छात्राओं ने उत्साह से सहभागिता निभाई। विद्यार्थियों ने पारंपरिक गरबा और डांडिया प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय लोक संस्कृति की समृद्ध विरासत को जीवंत किया।
संस्कृति और परंपराओं को सहेजना जरूरी – गुर्जर
कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि भारतीय संस्कृति हमारी पहचान और गौरव का प्रतीक है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कारों और परंपराओं के संरक्षण के प्रति भी जागरूक रहना चाहिए। इस प्रकार के आयोजन आपसी सौहार्द, एकता और सामूहिक सहभागिता की भावना को मजबूत करते हैं।
सांस्कृतिक आयोजनों से बढ़ता है विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास – प्रो. मांडोत
कुलपति प्रो. मंजू मांडोत ने कहा कि विश्वविद्यालय में आयोजित ऐसे महोत्सव विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच प्रदान करने के साथ उनमें रचनात्मकता, आत्मविश्वास और टीम भावना का विकास करते हैं। गरबा और डांडिया जैसे पारंपरिक नृत्य हमारी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।
महोत्सव के दौरान श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर एवं कुलपति प्रो. मंजू मांडोत ने प्रमाण पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
