उदयपुर। जीवन का सीधा संबंध आज और वर्तमान से ही रहता है। भले ही कहने में भूतकाल, भविष्यकाल या वर्तमान काल हों, लेकिन जाने वाला भूत ही आने वाला कल बन जाता है।ष् उक्त विचार डॉ. सुरेंद्र मुनि जी ने देवेन्द्र धाम में नवरात्रि के धार्मिक महत्व एवं भक्तामर महापाठ के स्वाध्याय के दौरान व्यक्त किए।
डॉ. सुरेंद्र मुनि ने कहा कि वास्तव में हमारा जीवन भूत व भविष्य की व्यर्थ कल्पनाओं में उलझकर दुखी रहता है, जिसके चलते हम वर्तमान को भी बर्बाद कर देते हैं। जिसने वर्तमान को सुधार लिया, उसका भूत और भविष्य अपने आप सुखद बन जाता है। हमें समय का सही प्रबंधन करना नहीं आता; हम आर्थिक, पारिवारिक और सामाजिक प्रबंधन में ही उलझे रहते हैं और अपने अनमोल जीवन की घड़ियों को व्यर्थ गंवा बैठते हैं।
समय व्यर्थ करना जीवन समाप्त करने के समानःडॉ. राजेंद्र मुनि
प्रवर्तक डॉ. राजेंद्र मुनि जी ने जिंदगी और समय को एक बताते हुए कहा कि समय व्यर्थ करना असल में जीवन को समाप्त करने जैसा है। कई लोग समय काटने के लिए व्यर्थ के कामों में उलझे रहते हैं, लेकिन जब समय की सांसें समाप्त हो जाती हैं, तब अंतिम समय में केवल पश्चाताप ही हाथ लगता है।
उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने प्रमाद का हमेशा निषेध किया है। समय पर मोती बन गए तो बन गए; जब खेत के दाने चिड़ियां चुग जाती हैं, उसके बाद पश्चाताप करना पूरी तरह व्यर्थ है। जिस तरह स्टेशन से गाड़ी निकल जाने के बाद सोचना व्यर्थ होता है, उसी तरह जीवन समाप्त होने पर यह कल्पना करना कि यह कर लेता या वह कर लेता, बेमानी है। कार्यक्रम के अंत में सभा में उपस्थित सभी समाजसेवियों का स्वागत सम्मान किया गया।
कल न कभी आया है न आएगा, आज पर ध्यान देंःडॉ. सुरेंद्र मुनि
