लैंगिक समानता, किशोर सहभागिता, सकारात्मक परवरिश और संस्थागत कार्रवाई पर दो दिवसीय सीएलएफ अभिमुखीकरण एवं क्षमता वर्धन कार्यशाला संपन्न
उदयपुर, 8 अक्टूबर। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के तत्वावधान एवं यूनिसेफ-अरावली के सहयोग से ’’‘पहचान प्लस’ कार्यक्रम’’ के अंतर्गत जिले में सीएलएफ मैनेजर, सीएलएफ अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्य समिति (एसएसी) सदस्यों के लिए दो दिवसीय अभिमुखीकरण एवं क्षमता वर्धन कार्यशाला 7 एवं 8 अक्टूबर को कृषि विज्ञान केंद्र, बड़गांव में आयोजित की गई। कार्यशाला में जिले के 48 सीएलएफ से कुल 122 प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
कार्यशाला का उद्देश्य सीएलएफ नेतृत्व को लैंगिक समानता, किशोर सहभागिता, सकारात्मक परवरिश, सामाजिक मुद्दों की पहचान, संस्थागत व्यवस्थाओं, रेफरल एवं शिकायत निवारण तथा सामूहिक कार्रवाई के लिए सक्षम बनाना रहा। 7 अक्टूबर को बड़गांव, कुराबड़, वल्लभनगर, भींडर, मावली, गिर्वा एवं गोगुंदा क्षेत्र के 24 सीएलएफ तथा 8 अक्टूबर को झाड़ोल, फलासिया, कोटड़ा, सायरा, खेरवाड़ा, नयागांव एवं ऋषभदेव क्षेत्र के 24 सीएलएफ के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम की शुरुआत यूनिसेफ के स्टेट कंसल्टेंट ज़मीर अनवर द्वारा ‘पहचान प्लस’ कार्यक्रम की पृष्ठभूमि, उद्देश्य एवं व्यापक दृष्टिकोण पर संदर्भ-निर्धारण सत्र के साथ हुई। उन्होंने सामाजिक बदलाव में सामुदायिक संस्थाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि आज के बदलते सामाजिक परिवेश में लैंगिक समानता केवल महिलाओं से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि बच्चों, किशोरों, परिवारों और पूरे समुदाय के समान एवं सुरक्षित विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने सीएलएफ जैसे सामुदायिक संस्थानों को सामाजिक मुद्दों की पहचान से लेकर सामूहिक कार्रवाई तक महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
जिला एसबीसी समन्वयक यशी पालीवाल ने ‘पहचान प्लस’ कार्यक्रम की अवधारणा, उद्देश्य एवं विभिन्न टूल्स पर चर्चा करते हुए बच्चों में आत्मसम्मान, आत्मविश्वास, सकारात्मक शरीर-बोध और सकारात्मक परवरिश के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि किशोरावस्था में बच्चों के व्यक्तित्व, क्षमताओं और सामाजिक पहचान को लेकर अनेक बदलाव आते हैं। इस दौरान परिवार और समुदाय का संवेदनशील व्यवहार उनके आत्मविश्वास एवं सकारात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस अवसर पर राजीविका की जिला प्रबंधक-आईबी सुश्री मेघा चौबीसा ने प्रतिभागियों को समुदाय के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने तथा सामाजिक मुद्दों के समाधान के लिए उपलब्ध संस्थागत व्यवस्थाओं का प्रभावी उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सामुदायिक संस्थाओं के माध्यम से सामाजिक मुद्दों पर संवेदनशीलता और सामूहिक कार्रवाई को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
जेंडर पर काम केवल जागरूकता नहीं, कार्रवाई की प्रक्रिया
कार्यशाला के महत्वपूर्ण सत्रों में जेंडर के संस्थागत ढांचे पर विशेष चर्चा हुई। पहले दिन राज्य संदर्भ व्यक्ति (एसआरपी) सुश्री सीमा काबरा ने जीपीपी, वीओ सामाजिक कार्य समिति, सीएलएफ सामाजिक कार्य समिति तथा पंचायत एवं ब्लॉक स्तर के जेंडर फोरम की संरचना, भूमिका एवं जिम्मेदारियों को विस्तार से समझाया। दूसरे दिन यशी पालीवाल ने संस्थागत ढांचे को आगे बढ़ाते हुए इसे व्यावहारिक कार्रवाई और सीएलएफ नेतृत्व की भूमिका से जोड़ा। उन्होंने बताया कि लैंगिक मुद्दे अक्सर शिक्षा, बाल विवाह, घरेलू जिम्मेदारियों, हिंसा, संसाधनों एवं अधिकारों तक पहुंच और निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़े होते हैं। इसलिए केवल जागरूकता पर्याप्त नहीं है। मुद्दे की पहचान, सही मंच तक पहुंच, संबंधित विभागों से समन्वय, रेफरल, कार्रवाई और फॉलो-अप-इन सभी को एक साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सीएलएफ मैनेजर एवं अध्यक्ष की भूमिका केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं है। वे अपने क्षेत्र में सामाजिक मुद्दों पर संवाद, संस्थागत समन्वय और सामूहिक कार्रवाई को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
‘कच्ची धूप’ से किशोर लड़कों के साथ सकारात्मक संवाद
प्रशिक्षण में जतन संस्थान के सह-संस्थापक डॉ. कैलाश बृजवासी ने ’कच्ची धूप’ मॉड्यूल’ के माध्यम से किशोर लड़कों के साथ संवाद एवं सकारात्मक सहभागिता पर गतिविधि आधारित सत्र लिया। उन्होंने किशोरों के अनुभवों, भावनाओं और बदलती सामाजिक जरूरतों को समझने तथा उनके साथ संवेदनशील संवाद स्थापित करने की आवश्यकता पर चर्चा की। सत्र में यह समझ विकसित की गई कि किशोर लड़कों को लैंगिक समानता और सकारात्मक व्यवहार से जोड़ना परिवार एवं समुदाय में स्वस्थ सामाजिक वातावरण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
केसर पालीवाल ने ‘पहचान प्लस’ के विभिन्न टूल्स तथा सीएलएफ मैनेजर एवं अध्यक्ष की भूमिका पर प्रतिभागियों के साथ संवाद किया। उन्होंने कार्यक्रम को समुदाय तक पहुंचाने में सीएलएफ नेतृत्व की भूमिका तथा बच्चों और परिवारों के साथ सकारात्मक संवाद को मजबूत करने की आवश्यकता पर चर्चा की। वहीं नरेंद्र मेघवाल ने पोषण सखी की भूमिका एवं मासिक कार्ययोजना पर चर्चा करते हुए समुदाय स्तर पर पोषण जागरूकता, नियमित कार्ययोजना, समुदाय की भागीदारी और संस्थागत समन्वय के विभिन्न पहलुओं को समझाया। अरविंद रेगर ने ‘कच्ची धूप’ सत्र से जुड़ी गतिविधियों एवं प्रतिभागियों की सहभागिता को सुगम बनाने में सहयोग किया।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने अपने क्षेत्र से जुड़े सामाजिक एवं लैंगिक मुद्दों, अनुभवों और चुनौतियों को साझा किया। समूह चर्चा एवं गतिविधियों के माध्यम से यह समझ विकसित की गई कि किसी मुद्दे की पहचान के बाद उसे सही संस्थागत मंच तक कैसे ले जाया जाए, संबंधित विभागों एवं स्टेकहोल्डर को कैसे जोड़ा जाए और सामूहिक कार्रवाई का फॉलो-अप कैसे सुनिश्चित किया जाए।
