उदयपुर पुलिस और पैसिफिक मेडिकल कॉलेज की अनूठी पहलः “जागृति” अभियान का हुआ शंखनाद, युवाओं को नशे से दूर रहने का दिया संदेश
युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को रोकने, मानसिक तनाव को दूर करने और एक सुरक्षित व स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से आज उदयपुर पुलिस तथा पैसिफिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में “जागृति युवा चेतना, नशा मुक्त जीवन” अभियान की भव्य शुरुआत की गई। आर.एन.टी. मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों, प्राध्यापकों और सैकड़ों विद्यार्थियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद “आरोग्य सेवा संस्थान” के कलाकारों द्वारा नशे के दुष्प्रभावों पर एक अत्यंत भावुक और आंखें खोल देने वाले नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति दी गई, जिसने सभागार में मौजूद सभी लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
जिला पुलिस अधीक्षक, उदयपुर डॉ. अमृता दुहन ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि शैक्षणिक तनाव और व्यवहार संबंधी समस्याओं का समाधान नशा कतई नहीं है। युवाओं को अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाना चाहिए। जिला पुलिस अधीक्षक, उदयपुर डॉ. अमृता दुहन ने एक विशेष हेल्पलाइन मोबाइल नंबर 8764527201 भी जारी किया, जिस पर युवा या उनके परिजन नशे की समस्या और अवैध मादक पदार्थों बेचने वालों की जानाकरी देने के लिए संपर्क कर सकते हैं। यह नम्बर जिला पुलिस अधीक्षक, उदयपुर के पास ही रहता है। उन्होंने आह्वान किया कि छात्र, अभिभावक और पुलिस मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण करें जहां नशे की कोई जगह न हो।
अभियान के दौरान उदयपुर पुलिस द्वारा की जाने वाली ‘7-Step’ सख्त कार्रवाईः कार्यक्रम में पुलिस प्रशासन द्वारा अभियान को धरातल पर पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए “चिकित्सा परामर्श, उपचार, पुनर्वास” के मूल मंत्र के साथ सात चरणीय कार्ययोजना की घोषणा की गई, जिसके तहत निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगेः
-
शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकताः जिले के सभी स्कूल-कॉलेजों में व्यापक स्तर पर नशा-विरोधी जागरूकता फैलाई जाएगी।
-
विभागों से संपर्क व कार्यशालाः संबंधित सरकारी विभागों से समन्वय स्थापित कर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी और सहायक सामग्री का निर्धारण होगा।
-
विशेषज्ञों की सूची व सत्र आयोजनः मनोचिकित्सकों और काउंसलर्स की सूची तैयार कर शिक्षण संस्थानों में विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।
-
फीडबैक व गुप्त बॉक्सः छात्रों से गोपनीय तरीके से जानकारी जुटाने के लिए कॉलेजों में गुप्त बॉक्स लगाए जाएंगे और फीडबैक लिया जाएगा।
-
टारगेट ग्रुप की पहचानः नशे की चपेट में आ चुके या संवेदनशील विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें हाईपर / लोअर टारगेट ग्रुप में वर्गीकृत किया जाएगा।
-
नशा मुक्ति केन्द्र में भर्ती: गंभीर रूप से नशे के आदी (हाईपर श्रेणी वाले) युवाओं को उपचार के लिए नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती करवाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
-
परिजनों को दिशा-निर्देश व मॉनिटरिंगः प्रभावित युवाओं के परिजनों (माता-पिता) को उचित काउंसलिंग व दिशा-निर्देश दिए जाएंगे और पीड़ित युवाओं की निरंतर मॉनिटरिंग (निगरानी) की जाएगी।
विशेषज्ञ डॉक्टरों और अतिथियों ने दी महत्वपूर्ण चिकित्सा सलाहः
• डॉ. सुरेश गोचर (विभागाध्यक्ष, साइकेट्रिस्ट विभाग, RNT मेडिकल कॉलेज): उन्होंने युवाओं को नशे से पूरी तरह दूरी बनाए रखने के संबंध में सलाह दी। • डॉ. आभा (मनोचिकित्सक, RNT मेडिकल कॉलेज): उन्होंने नशे के कारणों, इसकी लत और इसके सटीक उपचार के बारे में व हेल्पलाइन नंबर्स 1446, 1933 और 112 की जानकारी दी। • डॉ. राहुल जैन (प्रिंसिपल, RNT मेडिकल कॉलेज): उन्होंने शराब के खतरनाक वैज्ञानिक पहलुओं को सामने रखा। • डॉ. एम.एम. मंगल (वाइस चांसलर, पैसिफिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल): उन्होंने भी बच्चों में नशे के कारण होने वाले गंभीर शारीरिक और मानसिक नुकसान के बारे में विस्तार से बताया।
कार्यक्रम में श्री उमेश ओझा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, शहर, श्री मुकुल शर्मा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, मुख्यालय व श्रीमती टीना सोलंकी पुलिस निरीक्षक अपराध शाखा उपस्थित रहे।

