– आयड़ जैन तीर्थ में चातुर्मास के तहत धर्मसभा, बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने लिया धर्मलाभ
उदयपुर, 26 सितंबर। तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ जैन तीर्थ में मालव मार्तंड आचार्य भगवंत मुक्तिसागर सूरीश्वर महाराज, आचार्य अचल मुक्तिसागर सूरीश्वर महाराज सहित ठाणा-4 के सान्निध्य में चातुर्मास महोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं धार्मिक उल्लास के साथ जारी है। प्रतिदिन आयोजित धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं सहभागी बनकर धर्मलाभ ले रहे हैं।
जैन श्वेतांबर महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि आयड़ जैन तीर्थ के आत्मवल्लभ सभागार में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य भगवंत मुक्तिसागर सूरीश्वर महाराज ने सामायिक धर्म की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सर्वज्ञ भगवंतों द्वारा निर्दिष्ट सामायिक धर्म मोक्ष का श्रेष्ठ अंग और साधन है। सामायिक का अर्थ ही समभाव है। जीवन में कैसी भी अनुकूल अथवा प्रतिकूल परिस्थितियां आएं, लेकिन उन संयोगों के बीच मन में लेशमात्र भी राग-द्वेष के परिणाम उत्पन्न नहीं होने देना ही सामायिक की उत्कृष्ट भूमिका है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सामायिक धर्म की आराधना और साधना करनी चाहिए। आचार्यश्री ने कहा कि तीर्थंकर परमात्मा केवलज्ञान की प्राप्ति के बाद सर्वप्रथम सामायिक धर्म का उपदेश देते हैं। सामायिक से जीवात्मा को होने वाले लाभ को बताते हुए उन्होंने कहा कि सामायिक के माध्यम से सावद्य योग अर्थात पापकारी प्रवृत्तियों का त्याग होता है। सामायिक व्यक्ति को बाहरी परिस्थितियों से ऊपर उठकर आत्मा के समभाव में स्थित होने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन बड़ी मात्रा में स्वर्ण का दान करता है और दूसरा व्यक्ति प्रतिदिन सामायिक करता है, तो इतना दान करने वाला व्यक्ति भी सामायिक के बराबर नहीं हो सकता। सामायिक में आत्मशुद्धि, पाप प्रवृत्तियों के त्याग और समता की साधना का जो लाभ है, वह अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रत्येक श्रावक-श्राविका को जीवन में समभाव रखते हुए सामायिक की आराधना करनी चाहिए।
धर्मसभा में भोपाल सिंह नाहर, चन्द्र सिंह, अशोक जैन, राजेंद्र जावरिया, प्रकाश नागोरी, हेमंत सिंघवी, राजेश जावरिया, दिनेश बापना, भोपाल सिंह परमार, अभय नलवाया, कैलाश मुर्डिया, चतर सिंह पामेच, सतीश कच्छारा, दिनेश भंडारी, चिमनलाल गांधी, प्रद्योत महात्मा, रमेश सिरोया, कुलदीप मेहता सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।
सामायिक मोक्ष का श्रेष्ठ अंग और साधन है : आचार्य मुक्तिसागर
