अशोक नगर जैन मंदिर उदासीन आश्रम में दशलक्षण महापर्व के तपस्वियों का सामूहिक पारणा

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

– क्षमा वाणी से मन को द्वेषमुक्त कर मैत्री भाव अपनाएं : मुनि अरहसागर
– श्रावक-श्राविकाओं का किया सम्मान

उदयपुर, 26 सितंबर। दिगंबर जैन समाज के पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व के तहत अशोक नगर स्थित उदासीन आश्रम के श्री पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में गुरुवार को पर्युषण पर्व के अंतिम एवं दसवें दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म दिवस मनाया गया। मुनि अरहसागर महाराज एवं मुनि सुहित सागर महाराज के सान्निध्य में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्मलाभ लिया। इस दौरान भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, दशलक्षण विधान, भक्ति एवं प्रवचन सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन हुए।
चातुर्मास समिति अध्यक्ष महेंद्र टाया एवं उपाध्यक्ष प्रमोद ठोलिया ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के समापन अवसर पर अशोक नगर जैन मंदिर में 10 उपवास एवं 5 उपवास व 3 उपवास की तपस्या करने वाले श्रावक-श्राविकाओं का सामूहिक पारणा कराया गया। इस अवसर पर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने तपस्वियों का सम्मान कर उनकी तप-साधना की अनुमोदना की।
धर्म प्रभावना समिति महामंत्री प्रकाश अखावत एवं मीडिया प्रभारी रमेश वैद ने बताया कि महापर्व के दौरान मंदिर में प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।  प्रवचन के दौरान मुनि अरहसागर महाराज ने क्षमा वाणी के महत्व पर प्रकाश डाला। मुनि अरहसागर महाराज ने कहा कि ‘मिच्छामि दुक्कड़म्’ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, विनम्रता और आपसी प्रेम का संदेश है। क्षमा वाणी हमें अपने मन में किसी के प्रति रहे राग-द्वेष, कटुता और शिकायतों को त्यागकर प्रेम एवं सद्भाव के साथ आगे बढऩे की प्रेरणा देती है। जीवन में जाने-अनजाने अनेक भूलें होती हैं। कभी हमारे शब्द किसी को दुख पहुंचा देते हैं, कभी हमारे व्यवहार से किसी का मन आहत हो जाता है और कभी परिस्थितियों के कारण हम किसी के साथ न्याय नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि क्षमा वाणी हमें अपनी गलतियों को स्वीकार करने और हृदय से क्षमा मांगने की प्रेरणा देती है। क्षमा मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि मन की महानता का प्रतीक है। इसी प्रकार किसी की भूल को क्षमा कर देना भी उदार हृदय की पहचान है। जब व्यक्ति सच्चे मन से कहता है कि मेरे द्वारा मन, वचन या कर्म से आपको किसी भी प्रकार का दुख पहुंचा हो तो मैं हृदय से क्षमा प्रार्थी हूं, तब उसके भीतर का अहंकार कम होता है और रिश्तों में प्रेम एवं विश्वास बढ़ता है। मुनिश्री ने कहा कि क्षमा वाणी का उद्देश्य केवल एक दिन क्षमा मांग लेना नहीं, बल्कि जीवन में क्षमा, संयम, अहिंसा और करुणा को अपनाना है। हमें ऐसा जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए, जिससे हमारे शब्दों और कर्मों से किसी को पीड़ा न पहुंचे। इस पावन अवसर पर मन को द्वेष से मुक्त कर सभी के प्रति मैत्री भाव रखते हुए जीवन को प्रेम, शांति और सद्भाव से भरने का संकल्प लेना चाहिए।
पंडित विद्वान डॉ. सुमत कुमार जैन एवं विद्वान राजवीर शास्त्री ने बताया कि इस अवसर पर महेंद्र टाया, प्रकाश अखावत, रमेश वैद, कैलाश गंगवाल, सुमत प्रकाश बालावत, प्रमोद ठोलिया, नरेंद्र टाया, जगदीश जैन, मनोज कमावत, राजेश गंगवाल, डॉ. प्रेमचंद, हेमंत बोहरा, दिनेश डवारा, अभिषेक जैन, चंद्रेश जैन, डॉ. गौरव, डॉ. वैभव, उजाला ठाकुरडिया, शालु जैन, नेहा जैन, जिनेंद्र गंगावत, राहुल, महावीर टीमरवा, मनीष गोदावत, अशोक डवारा, जिनेंद्र मेडिस्टेंड, जितेंद्र, अजीत आवोत, अनिल मेहता महिलाओं में अर्चना पटवारी, सर्वेश जैन, प्रभा टाया, इंदिरा डवारा, कल्पना गांगावत, नीता गांगावत, मंजू शाह, सरोज बोहरा, संगीत डवारा, संपतजी, सीमा कमावत, सावित्री टाया, कीर्ति जी एवं संगीत भारती सहित अनेक श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजनों में सहभागिता की।

By Udaipurviews

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