उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में आयोजित आध्यात्मिक प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने सोमवार को कहा कि परमात्मा महावीर ने प्रचंड पुरुषार्थ के माध्यम से केवल्य ज्ञान का दिव्य वैभव प्राप्त किया। जब व्यक्ति आत्मिक वैभव का अधिकारी बन जाता है, तो उसकी अन्य सांसारिक इच्छाएं स्वतः समाप्त होने लगती हैं। उन्होंने कहा कि संसार में दो प्रकार की संपदा होती हैकृएक ऐसी जो आती है और चली जाती है, जिसे चंचल संपदा कहा जाता है, जबकि दूसरी ऐसी है जो एक बार प्राप्त होने के बाद स्थायी रहती है और शाश्वत कहलाती है। हमें तय करना है कि जीवन में चंचल संपदा चाहिए या शाश्वत संपत्ति।
साध्वी श्रीजी ने जीवन की आध्यात्मिक स्थिति को अस्पताल और होटल के उदाहरण से समझाते हुए कहा कि बीमारी होने पर व्यक्ति अस्पताल जाता है, जहां चिकित्सक की सलाह के अनुसार उसे रहना पड़ता है। वहीं होटल में व्यक्ति अपनी इच्छा से रहता, खाता और जीवन व्यतीत करता है। इसी प्रकार संसार कर्मों के बंधन का होटल है, जबकि चतुर्विद संघ कर्मों के क्षय का अस्पताल है। संसार में रहते हुए मनुष्य नए कर्मों का बंधन करता है और धर्मसंघ में आकर उन कर्मों को क्षय करने का मार्ग प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति साधु बनने की स्थिति में नहीं है तो श्रावक बनकर भी धर्म के मार्ग से जुड़ सकता है। जैसे बीमारी का अहसास होने पर व्यक्ति अस्पताल पहुंचता है, उसी प्रकार जीवन की आध्यात्मिक बीमारी का बोध होने पर मनुष्य को धर्मसंघ की शरण लेनी चाहिए।
साध्वी श्रीजी ने कहा कि “जान है तो जहान है।” बीमारी के समय व्यक्ति जीवन बचाने के लिए अपना सब कुछ लगाने को तैयार हो जाता है, लेकिन विडंबना यह है कि मनुष्य को अपनी आध्यात्मिक बीमारी का अभी तक अहसास ही नहीं हुआ है। कर्मों के बंधन से मुक्ति और आत्मकल्याण का मार्ग धर्म, साधना और संघ के माध्यम से ही संभव है। इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया।
दादावाड़ी, उदयपुर मे गुरूवर्या श्री के दर्शनार्थ विशेष मेहमानों में अहमदाबाद से आये ट्रस्टी रतन लाल हाला वाले ,बाबूलाल लुनिया,एवं चैन्न्ई से आये क्यूप के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश लुनिया का दादावाड़ी ट्रस्ट मंडल एवं चतुर्मास समिति की ओर से बहुमान किया गया।
चंचल नहीं, शाश्वत संपदा की चाह रखें, कर्मों की बीमारी का उपचार धर्मसंघ मेंःसाध्वी विद्युतप्रभा
