उदयपुर, 3 अगस्त। दादावाड़ी में चल रहे आध्यात्मिक चातुर्मास के अंतर्गत सोमवार को खरतरगच्छ समिति के तत्वावधान में आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने श्रद्धापूर्वक सहभागिता की। प्रवचन प्रभाविका, विदुषी साध्वी डॉ. श्री विद्युत् प्रभा श्रीजी म.सा. ने कहा कि चातुर्मास का वास्तविक उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मजागरण और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। जब आत्मा में सद्धर्म की प्यास जागृत होती है, तभी चातुर्मास सफल माना जाता है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रकृति में अच्छी वर्षा और भरपूर फसल चातुर्मास की सफलता का प्रतीक होती है, उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में आत्मतत्त्व और परमात्मतत्त्व की अनुभूति ही आध्यात्मिक सफलता का प्रमाण है। बाहरी उपलब्धियों से अधिक आवश्यक है कि व्यक्ति अपने भीतर झांके और स्वयं को बेहतर बनाने का प्रयास करे।
साध्वीश्री ने बाहरी और आंतरिक जीवन का अंतर समझाते हुए कुएं तथा जलाशय के जल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कुएं का जल भीतर से स्वयं प्रस्फुटित होता है, जबकि टंकी या जलाशय का जल बाहर से भरा जाता है। ठीक इसी प्रकार वास्तविक ज्ञान और आत्मबल भी भीतर से जागृत होता है। उन्होंने गौतम स्वामी के जीवन का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि इन्द्रभूति जैसे महान विद्वान को भी परमात्मा महावीर की शरण में आने के बाद ही आत्मज्ञान की प्राप्ति हुई।
प्रवचन में उन्होंने भगवान महावीर और गौतम स्वामी के संवाद, अप्प दीपो भव के संदेश तथा आत्मनिरीक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परमात्मा की कृपा, गुरु का आशीर्वाद, माता-पिता का स्नेह तथा दीन-दुखियों और मूक प्राणियों की दुआएं जीवन की सबसे बड़ी शक्ति हैं। श्रीकृष्ण-सुदामा की मैत्री और चरित्र सूत्र के प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने सच्ची मित्रता, त्याग, धर्म और आदर्श जीवन के मूल्यों को सहज रूप में समझाया।
कार्यक्रम में ट्रस्ट मंडल अध्यक्ष राज लोढ़ा, चातुर्मास संयोजक गजेंद्र भंसाली, उपाध्यक्ष शैलेंद्र लोढ़ा, गौरव कोठारी, केएमपी की पूर्व अध्यक्षा माया सिरोया, ऋतु पारिख तथा वंदना गन्ना ने तपस्वियों एवं अतिथियों का स्वागत-अभिनंदन किया। चातुर्मास सह-संयोजक सुभाष महात्मा ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
चातुर्मास तभी सफल, जब आत्मा में जागे परिवर्तन की चेतनाःसाध्वी डॉ. विद्युत् प्रभा श्रीजी
