जब कोई साथ नहीं देता, तब लाल झंडा साथ देता है

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उदयपुर। माकपा जिला सचिव राजेश सिंघवी ने कहा कि जब राज नहीं सुनता, जात नहीं सुनती, गांव नहीं सुनता, जब कोई साथ नहीं देता, तब लाल झंडा साथ देता है। वे सोमवार को माकपा की गोगुंदा तहसील कमेटी की भानपुरा में हुई बैठक में सम्बोधित कर रहे थै। सिंघवी ने कहा कि लाल झंडा जादू का हथियार है, इसके हाथ में लेते ही इंसान को कई बीमारियों और समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है! उन्होंने कहा कि इस दौर में जब चारों ओर निराशा का वातावरण है, वहां एक मात्र लाल झंडा ही उम्मीद की किरण है। जिला सचिव मंडल सदस्य गुमान सिंह राव ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस पार्टी ने गोगुंदा की जनता को बारी-बारी से लूटा है लेकिन अब इस इलाके की गरीब जनता ने लाल झंडे को पकड़ लिया है, वह अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर बेहतर जीवन के लिए आगे बढ़ेगी! उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जाति, धर्म के नाम पर एकता तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन लाल झंडा ऐसा नहीं होने देगा और वह व्यापक एकता का निर्माण करेगा! आदिवासी जन अधिकार एका मंच के जिला अध्यक्ष हाकरचंद खराडी ने कहा कि आदिवासी, वनवासी न  होकर मूल निवासी है लेकिन भाजपा उन्हें वनवासी बता जंगल से बेदखल करना चाहती है! उन्होंने कहा कि भाजपा ने सत्ता में आने के बाद किसी एक भी आदिवासी को पटटे नहीं दिए, उल्टे  कई बार आदिवासियों को हमले कर बेदखल किया है! उदयपुर शहर सचिव हीरालाल सालवी ने कहा कि गोगुंदा में घर घर बीमारी फैली हुई है लेकिन इलाज की व्यवस्था नहीं है! उन्होंने कहा कि जब कोई नहीं होता, तब लाल झंडा उसका इलाज करेगा। तहसील सचिव श्रवण ने कहा कि पढ़ा लिखा आदिवासी युवा रोजगार के लिए भटक रहा है लेकिन उसे सभी जगह अपमान का सामना करना पड़ रहा है! खेती भी इस तरह की नहीं है कि वह अपना पेट भर सके! उन्होंने कहा कि युवा को दर- दर की ठोकर खाने को मजबूर कर उसके सपनों के साथ कुठाराघात किया जा रहा है। जो युवा घर परिवार समाज के लिए संपदा है वह सरकारों की नीतियों के कारण बोझ बन गया है! किसान नेता कानाराम ने कहा कि जंगल पर्यटन के लिए बचाए जा रहा है, जानवरों के लिए बचाए जा रहे हैं लेकिन आदिवासियों को बेदखल किया जा रहा है जबकि आदिवासी है तो जंगल है आदिवासी  से ही जंगल आबाद है! उन्होंने कहा कि सरकार विकास के नाम पर विनाश का खेल खेल रही है! सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण गरासिया, बाबू, तुलसी भाई, लाल दास महाराज आदि ने भी संबोधित किया। उन्होंने  जनगणना में आदिवासी कालम को जोड़ने की मांग की! बैठक की अध्यक्षता जनजीतराम, वरदाराम ने की। बैठक का प्रारंभ झंडा रोहण कर किया गया। बैठक में सर्वसम्मति से 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस को सायरा में आदिवासी अधिकार दिवस के रूप में मनाने और इस दौरान घर-घर आदिवासियों को जागृत करने का अभियान चलाने का निर्णय लिया गया!

By Udaipurviews

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