उदयपुर। राजस्थान के विभिन्न सरकारी विभागों में वर्षों से कार्यरत ठेका कर्मचारियों ने अपने वेतन में वृद्धि, शोषण से मुक्ति तथा नियमितीकरण की मांग को लेकर आवाज बुलंद की है। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से कम्प्यूटर ऑपरेटर, कार्यालय सहायक एवं अन्य पदों पर कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें न्यूनतम मजदूरी से भी कम वेतन दिया जा रहा है।
कर्मचारियों के प्रतिनिधि डांगी ने बताया कि प्रदेश के कई विभागों में ठेका कर्मचारी मात्र ₹6000, ₹7000 एवं ₹9334 मासिक वेतन पर कार्य करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश ठेका कर्मचारी नियमित सरकारी कर्मचारियों से पहले कार्यालय पहुंचकर कार्य शुरू करते हैं और देर तक कार्यालय में रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं, इसके बावजूद उन्हें उचित वेतन एवं सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
कई विभागों में ठेका कर्मचारियों से प्रतिदिन 8 घंटे से अधिक कार्य लिया जाता है, लेकिन अतिरिक्त समय के लिए कोई ओवरटाइम या अन्य भत्ता नहीं दिया जाता। साथ ही राजकीय अवकाशों एवं अन्य कर्मचारी सुविधाओं का लाभ भी उन्हें नहीं मिल पाता है।
उन्होंने कहा कि संविधान एवं न्यायालयों द्वारा समय-समय पर दिए गए “समान कार्य के लिए समान वेतन” के सिद्धांत का पालन नहीं हो रहा है। ऐसे में सरकार को ठेका कर्मचारियों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
ठेका कर्मचारियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि सभी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी की जाए, उन्हें श्रमिक कल्याण मजदूरी के अनुरूप भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा ठेका प्रथा को समाप्त कर एक राजकीय बोर्ड या संस्था का गठन किया जाए। इस बोर्ड के माध्यम से सभी विभागों में कार्यरत ठेका कर्मचारियों को समायोजित किया जाए।
इसके अलावा कर्मचारियों ने वर्षों से सेवाएं दे रहे ठेका कर्मचारियों को नियमित (स्थायी) करने की भी मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए आंदोलन के लिए कोर्ट में पेश होंगे।
