उदयपुर, 31 मई। पत्रकारिता महज घटना की सूचना देने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है, एक विचार है, एक मंथन है। न्याय, शुचिता, सुराज, सुसंस्कृत समाज के निर्माण के लिए पत्रकार की भी उतनी ही भूमिका है जितनी समाजसुधारकों, विचारकों, संतों आदि की होती है। इस दिशा में कार्य करने वाले संत भी उस समय के पत्रकार ही कहे जाएंगे, जब उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों को सुधारने के लिए जागरूकता के आंदोलन खड़े किए। और महर्षि दयानंद सरस्वती जैसी महान विभूति भी उस समय की स्थितियों में समाज को जागरूक करने वाले एक पत्रकार कहे जाने चाहिए।
यह उद्गार रविवार को यहां गुलाबबाग स्थित नवलखा महल के माता लीलावंती सभागार में मुख्य वक्ता के रूप में श्रीमद् दयानंद सत्यार्थ प्रकाश न्यास के अध्यक्ष डॉ. अशोक आर्य ने व्यक्त किए। हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (जार) की उदयपुर इकाई के तत्वावधान में आयोजित कलम प्रहरी सम्मान – 2026 में उन्हों कहा कि गुजराती मूल के होते हुए भी महर्षि दयानंद ने वेदों की मीमांसा हिन्दी में लिखी। उनका भी यही मानना था कि हिन्दी भारतवर्ष में सहज रूप से समझी जाने वाली भाषा है, इसलिए अपनी स्थानीय भाषा के साथ हिन्दी भी संवाद के लिए उपयोग में ली जानी चाहिए। महर्षि दयानंद ने उस समय में वेदभाष्य मासिक पत्रिका के रूप में क्रमशः प्रकाशित किए। डॉ. आर्य ने कहा कि तब हिन्दी को अंग्रेजी और फारसी (उर्दू) से संघर्ष करना पड़ रहा था और आज फिर से हिंग्लिश से संघर्ष हो रहा है। जिस प्रकार महर्षि दयानंद के सामने सामाजिक जागरूकता करते समय संघर्ष था, उतना ही संघर्ष आज भी पत्रकारों के समक्ष है।
समारोह के मुख्य अतिथि समाजसेवी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण परिषद्, उदयपुर डिस्ट्रिक्ट चेयरमैनएडवोकेट निर्मल कुमार पंडित ने कहा कि पत्रकारिता को अपनी कलम को लगातार प्रखर करते रहना होगा। समय के साथ सामाजिक बदलाव होता है, अच्छाई के साथ कुछ खामियां भी शामिल हो जाती हैं, उन खामियों में सुधार के लिए कलमकार को नए जमाने के हिसाब से विचारों का प्रखर प्रकटीकरण करना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के उपनिदेशक गौरीकांत शर्मा ने कहा कि आज की पीढ़ी को उस पीढ़ी से सीख लेनी चाहिए जिन्होंने पैदल चलकर पत्रकारिता की, जबकि आज तकनीक ने उन तपस्वी पत्रकारों की तपस्या को भुला दिया है। उन्होंने जार उदयपुर इकाई को ऐसे वरिष्ठों का सम्मान करने पर बधाई दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जार के प्रदेश सह संयोजक व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष शर्मा ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता के 200वें वर्ष में जार उदयपुर की ओर से वर्ष पर्यन्त आयोजन किए जाएंगे जिनमें वरिष्ठ पत्रकारों का सम्मान किया जाएगा।
जार उदयपुर के अध्यक्ष राकेश शर्मा राजदीप ने बताया कि समारोह में उदयपुर शहर के वरिष्ठ पत्रकार नरेश शर्मा, श्रीकृष्ण जुगनू, राहुल शर्मा, राजेन्द्र शेखर व्यास, राजेन्द्र हिलोरिया और मांगीलाल लोहार का सम्मान किया गया। सभी वरिष्ठ पत्रकारों ने अपनी पत्रकारिता के सफर के संस्मरण साझा किए। सभी वरिष्ठ पत्रकारों के साथ उनकी पत्नी का भी सम्मान किया गया। इसके पीछे उद्देश्य यह रहा कि पत्रकार जब वक्त-बेवक्त समाज को समय देता है तब परिवार का ध्यान पत्नी ही संभालती हैं। ऐसे में पत्नी के सहयोग के बिना पत्रकार चिंतामुक्त होकर कार्य नहीं कर सकता।
जार उदयपुर के महासचिव दिनेश हाड़ा ने बताया कि संचालन अनिल चतुर्वेदी ने किया। कार्यक्रम में सत्यार्थ प्रकाश न्यास के संयुक्त मंत्री डॉ. अमृत लाल तापड़िया, मंत्री भवानी दास आर्य, कोषाध्यक्ष नारायण मित्तल, व्यवस्थापक भंवर गर्ग, संयोजिका दुर्गा गोरमात, जार के प्रदेश कोषाध्यक्ष कौशल मूंदड़ा, प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक वैष्णव, नानालाल आचार्य, प्रदेश सचिव राजेश वर्मा, उदयपुर जिला जार इकाई के शंकर चावड़ा, योवंतराज माहेश्वरी, बाबूलाल ओड़, जितेंद्र माथुर, हरीश नवलखा, दिनेश औदिच्य, लक्ष्मण गोराण, नारायण लाल सेन, नवरतन खोखावत, घनश्याम जोशी, ओमपाल सीलन, हिमांशु परिहार, सुनील कालरा, लक्षित लोहार, दिग्विजय जैन, सावन दोसी, लोकेश मेनारिया, ऋषभ सिंह गहलोत, नरेन्द्र सेठिया, नंदलाल माली, दीपक माली, राजेश शर्मा, कमलेश जैन, नरेश मुर्डिया, तथागत शर्मा आदि उपस्थित रहे। समारोह उपरांत सभी ने नवलखा महल में नवस्थापित राष्ट्र मंदिर दीर्घा के दर्शन किए। न्यास की ओर से पत्रकारों को सत्यार्थ प्रकाश का साहित्य भी प्रदान किया गया।
