भक्ति हमारी पसन्दगी बने तो ही जीवन परिवर्तित हो सकता है : आचार्य विजयराज
उदयपुर, 24 सितम्बर। केशवनगर स्थित अरिहंत वाटिका में आत्मोदय वर्षावास में मंगलवार को धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए हुक्मगच्छाधिपति आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने कहा कि भूख तीन प्रकार की होती है-पेट की भूख, मन की भूख व आत्मा की भूख। पेट की भूख आहार से, मन की भूख शब्दों के भोग, इन्द्रियादि के भोग से एवं आत्मा की भूख भक्ति से मिटती है। ज्ञानीजन कहते हैं कि आत्मा की भूख को शान्त करना है तो भक्ति को जगा लो। इसके जगते ही पुद्गलों का राग-रंग, छाया-माया छूटने लगती है। जीव पर पुद्गलों की छाया-माया इतनी जबर्दस्त है कि…
