सच्चे जैन वही हैं जो प्रभु के सिद्धान्तों को अपने जीवन में जीते हैं : आचार्य विजयराज
उदयपुर, 3 सितम्बर। केशवनगर स्थित अरिहंत वाटिका में आत्मोदय वर्षावास में मंगलवार को हुक्मगच्छाधिपति आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने धर्मसभा में कहा कि जैन दो प्रकार के होते हैं-जन्म सिद्ध जैन एवं कर्म सिद्ध जैन। दोनों ही प्रभु को प्रिय हैं। सच्चे जैन वही हैं जो प्रभु के सिद्धान्तों को अपने जीवन में जीते हैं। जैन वही होता है जो नमस्कार में विश्वास रखता है, तिरस्कार में नहीं परिष्कार में विश्वास रखता है, उपेक्षा में नहीं, उपकार में विश्वास करता है, उपहास में नहीं सहयोग में, धन में नहीं धर्म में विश्वास करता है, द्वेष में नहीं प्रेम में…
