उदयपुर, 22 जुलाई। केशवनगर स्थित अरिहंत वाटिका में आत्मोदय वर्षावास में सोमवार को धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए हुक्मगच्छाधिपति आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने कहा कि आत्मा का विकास करना हो तो जीवन में तीन बातें अपनाना जरूरी है पहली-भौतिक वस्तुओं के प्रति मोह को कम कर उन्हें छोड़ते जाओ, दूसरी-व्यक्तियों को जोड़ते जाओ तथा तीसरी-वृत्तियों को मोड़ते जाओ। याद रखें आत्मविकास चाहने वाले अजीव वस्तुओं के प्रति ममता, मूर्च्छा व लगाव कुछ नहीं रखते। समझदार व्यक्ति जीव से प्रेम करते हैं व अजीव का उपयोग करते हैं। आत्म विकास चाहने वाले अपनी वृत्तियों को मोड़ कर प्रवृत्तियों व पुनरावृत्तियों को रोक देते हैं। उपाध्याय श्री जितेश मुनि जी म.सा. ने कहा कि धन केवल मेहनत व बुद्धि से नहीं मिलता अपितु उसके साथ पुण्य जुड़ा हो तो ही मेहनत व बुद्धि सफल होती है। पाप का पैसा कभी सुखी नहीं रहने देता। पाखाने की ईंट कभी मंदिर में नहीं लगाई जाती है, इसलिए कहा है जिंदगी में दौलत का कोई पयाम नहीं, ये वक्त आने पर स्थान बदल लेती है। श्रीसंघ के मंत्री पुष्पेन्द्र बड़ाला ने बताया कि सोमवार को कालूलाल चन्द्रा देवी, विक्रम सिंह, मुकेश कुमार, राकेश कुमार तातेड़ की ओर से 500 तेला तपाराधकों को पारणा करा कर प्रभावना प्रदान की गई।
समझदार व्यक्ति जीव से प्रेम करते हैं व अजीव का उपयोग करते हैं: आचार्य विजयराज
