कर्म जब सजा देता है तो कोई जमानत नहीं चलती : आचार्य विजयराज

उदयपुर, 12 नवम्बर। केशवनगर स्थित अरिहंत वाटिका में मंगलवार को आयोजित धर्मसभा में कहा कि आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने कहा कि कर्म की अदालत में वकालत नहीं चलती। कर्म जब सजा देता है तो कोई जमानत नहीं चलती। मनुष्य को दो लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए-कर्म करने में सावधान बनें एवं कर्मोदय के समय समभाव रखें। यही कर्म की जागरणा है। अवगुणी का मोक्ष नहीं होता और मोक्ष हुए बिना निर्वाण नहीं होता। मोक्ष के लिए मोह का क्षय होना जरूरी है, जबकि संसारी तो मोह बढ़ाने में विश्वास करते हैं। यह मोह ही हमें रूलाता है। हम अपना समय, समझ, बुद्धि आदि मोह को घटाने में नियोजित करें। आपने पूज्य श्री चौथमल जी म.सा. का भजन उद्धृत करते हुए कहा कि सम्यक् ज्ञान एवं सम्यक् क्रिया के बिना मुक्ति नहीं मिल सकती। अतः नित्य सत्यक् ज्ञान व शुद्ध क्रिया उमंग से करें तभी मुक्ति नजदीक होगी। श्रद्धेय श्री विशालप्रिय जी म.सा. ने भी उद्बोधन प्रदान किया। संघ अध्यक्ष इंदर सिंह मेहता ने बताया कि आज प्रवचन सभा में छत्तीसगढ़, चैन्नई, बैंगलोर, केकड़ी, सटाना, मंदसौर, इंदौर, मुम्बई, भीलवाड़ा, उज्जैन, देवास, बीकानेर, रतलाम, मंगलवाड़ आदि स्थानों के श्रद्धालुजन उपस्थित रहे। प्रवचन सभा में महावीर जी सिसोदिया ने विचार रखे एवं सुशीला भाणावत व सखियों ने गीत प्रस्तुत किया।

By Udaipurviews

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