व्यक्ति ने कैसे भी पाप किये हो अगर वो तीर्थ पर जाकर अन्तःकरण से प्रायश्चित करता है तो उसकी आत्मा प्रक्षालित होतीःसाध्वी संयमज्योति

उदयपुर। समता मूर्ति साध्वी जयप्रभा की सुशिष्या साध्वी डॉ. संयम ज्योति तीर्थ की महिमा बताते हुए कहा कि व्यक्ति ने कैसे भी पाप किये हो अगर वो तीर्थ पर जाकर अन्तःकरण से प्रायश्चित करता है तो उसकी आत्मा प्रक्षालित होती है उज्जवल होती है।
साध्वी ने गिरनार वंदनावली कराते हुए कहा कि गिरनार में अनंत तीर्थकरों के कल्याणक हुए। वह भूमि अनंत तीर्थकरों के कल्याणकों से पावन बनी हुए है। तीर्थंकर की देशना के अणु परमाणु वहाँ के वातावरण में फैले हुए जिससे व्यक्ति को पॉज़िटिव वाइब्रेशन मिलती है। व्यक्ति का एटीट्यूट पॉज़िटिव हो जाता है।
उन्होंने कहा कि विज्ञान भी इस बात को स्वीकार करता है कि असंख्य वर्षों तक अनु परमाणु वातावरण में रह सकते है। तीर्थों की पावन भूमि से व्यक्ति का विज़न राइट हो जाता है वही राईट विजन व्यक्ति को मुक्ति भी दे सकता है।
साध्वी संयम साक्षी ने कहा कि हमंे हजारों कष्टों को सहकर भी अरिहंत बनना है। अरिहंत आत्मा को किसी से लगाव या टकराव नहीं होता है। वह हर स्थिति में समभाव में रहता है। सबके प्रति मैत्री भाव रखती है। संसार के सभी जीव मुखी हो जाये, ऐसे उसके अंतर्भाव रहते है।

By Udaipurviews

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