होली पर राजससंघ में सजे वन धन उत्पादों के स्टॉल, हर्बल गुलाल को मिली खास सराहना

उदयपुर, 17, फ़रवरी। होली पर्व के अवसर पर राजस्थान जनजाति क्षेत्रीय विकास सहकारी संघ  (राजससंघ), राजस्थान सरकार के मुख्यालय, प्रताप नगर, उदयपुर में राजस्थान में संचालित वन धन विकास केन्द्रों द्वारा निर्मित हर्बल उत्पादों की विशेष प्रदर्शनी एवं विक्रय स्टॉल का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर हर्बल गुलाल, जंगली शहद, हर्बल साबुन, सफेद मुसली, विभिन्न प्रकार के शरबत एवं अन्य वनोपज आधारित उत्पाद आकर्षण का केंद्र रहे।
स्टॉल पर स्थानीय उपभोक्ताओं द्वारा जनजातीय समुदाय की पारंपरिक ज्ञान एवं प्रप्राकृतिक संसाधनों से तैयार किए गए उत्पादों की गुणवत्ता की सराहना की गई तथा इन उत्पादों की मांग में उत्साहजनक वृद्धि देखी गई। विशेष रूप से रासायनिक रंगों के विकल्प के रूप में हर्बल गुलाल को लोगों ने सुरक्षित एवं पर्यावरण अनुकूल विकल्प के रूप में पसंद किया।
राजससंघ के अधिकारी सहायक प्रबंधक रजनीश कुमार मीना ने बताया कि वन धन विकास केन्द्र, विभाग द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से लघु वनोपज का संग्रहण, मूल्य संवर्धन एवं विपणन किया जाता है। राजस्थान में 530 वन धन विकास केन्द्र सक्रिय रूप से कार्यरत हैं, जिनके माध्यम से जनजातीय परिवारों को स्वरोजगार एवं आय सृजन के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
वन धन योजना के अंतर्गत जनजातीय स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण, उपकरण, एवं विपणन सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिससे वे कच्चे वनोपज को प्रसंस्कृत कर बाजार योग्य उत्पाद में परिवर्तित कर सकें। इससे एक ओर जहां स्थानीय संसाधनों का समुचित उपयोग हो रहा है, वहीं दूसरी ओर जनजातीय समुदाय की आय में वृद्धि एवं आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित हो रहा है।
राजस्थान में वन धन विकास केन्द्र न केवल आजीविका संवर्धन का माध्यम बने हैं, बल्कि “वोकल फॉर लोकल” की भावना को भी सशक्त कर रहे हैं। होली जैसे त्योहारों पर इस प्रकार की पहल से जनजातीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध हो रहा है तथा समाज में प्राकृतिक एवं स्वदेशी उत्पादों के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है। कार्यक्रम में राजीविका से रक्षित चित्तोड़ा, राजससंघ के अधिकारी, कर्मचारी व आमजन उपस्थित रहे।

By Udaipurviews

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