उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ की और से सिन्धी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में श्रमण संघीय प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज ने चातुर्मास के अवसर पर प्रातः कालीन धर्म सभा में कहा कि मनुष्य के कर्मबन्धन में बन्धने का कारण यही है कि वह जीवन में कहता कुछ है, करता कुछ है, सुनता कुछ है और बोलता कुछ है।
जब उसके जीवन में एक रुपता नहीं होती है तभी वह कर्मबंधों में बंध जाता है। जीवन में बिना एकरूपता लाए और बिना धर्म के आपका जीवन नहीं चल सकता। जब तक जीवन से झूठ और छल कपट बाहर नहीं होंगे हमारे जीवन का उत्थान और हमारे जीवन का कल्याण संभव नहीं है। इन सबसे अगर हमें छुटकारा पाना है तो हमैं प्रभु महावीर की वाणी को सुन और ग्रहण कर अपने जीवन में उतरना चाहिए। लेकिन मनुष्य संसार के मोह माया जाल में ऐसा उलझ जाता है कि उसे दूसरी कोई चीज या वस्तु नजर ही नहीं आती। जब संसार के जाल में उलझने के बाद उसे दूसरी वस्तु नजर नहीं आती तो मोक्ष मार्ग कहां से नजर आएगा। भगवान महावीर स्वामी कहते हैं कि 84 लाख जीव में से मात्र मनुष्य जीवन ही ऐसा है कि जिसमें रहते हुए व्यक्ति मोक्ष मार्ग को प्राप्त कर सकता है। मनुष्य शरीर पर ही ज्यादा ध्यान देता हैं। जबकि शरीर को तो एक दिन मिट्टी में मिल जाना है। एक दिन इस शरीर को अग्नि को समर्पित करना है। उसके बाद शरीर का कोई वजूद नहीं रह जाता। तो फिर हम शरीर के वशीभूत होकर के ऐसे काम क्यों करें जिसकी वजह से हमें अगले भव में भी दुख भोगना पड़े। हमें निरंतर हमारी आत्मा को साधने के प्रयास करने चाहिए और धर्म ध्यान के माध्यम से शुद्ध भाव से हमें प्रभु की आराधना करनी चाहिए।
धर्मसभा में डॉ.वरुण मुनि ने महावीर भगवान के साधन काल के कई प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि संसार में पांच चीज अति दुर्लभ होती है। पहला मनुष्य जीवन दूसरा मनुष्यता तीसरी शुद्ध श्रद्धा चौथा संयम और पांचवा पुरुषार्थ। यह सभी संसार में दुर्लभ होते हैं। मनुष्य जीवन मिल गया और उसमें मनुष्यता नहीं है तो मनुष्य जीवन का कोई औचित्य भी नहीं। जो कर्म आप करेंगे वही कर्म आपके साथ जायेंगे। आपका किया ही आपके साथ जाएगा। जिस तरह से एक देश की मुद्रा दूसरे देश में नहीं चलती है। उसी तरह से एक भव के कर्म दूसरे भव में नहीं चलते हैं।
धर्मसभा में अखिलेश मुनि ने सुंदर गीतिका प्रस्तुत की। महामंत्री एडवोकेट रोशन लाल जैन ने बताया कि चातुर्मास काल से ही णमोकार महामंत्र की धर्म आराधना निरंतर जारी है। बुधवार को सोजत सिटी से आए अतिथियों का धर्म सभा में स्वागत अभिनंदन किया गया। धर्मसभा में मेवाड़ वागड़ क्षेत्र सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का आना लगातार जारी है।
जीवन से झूठ और छल कपट बाहर नहीं होंगे,तब तक जीवन का उत्थान और कल्याण संभव नहींः सुकनमुनि
