संसद में उदयपुर: आरबीआई का एआई टूल म्यूलहंटर रोकेगा डिजिटल धोखाधड़ी

-सांसद रावत के प्रश्न पर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री ने दी जानकारी
उदयपुर। भारतीय रिज़र्व बैंक ने मनी म्यूल की पहचान के लिए एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित टूल म्यूलहंटर आरंभ किया है और इसके उपयोग के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों को सलाह दी।
ऑनलाइन धोखाधडी की घटनाओं को लेकर सांसद डॉ. मन्ना लाल रावत की ओर से संसद में पूछे गए प्रश्न पर वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने यह जानकारी दी। सांसद डॉ रावत ने सरकार द्वारा डिजिटल लेनदेन में धोखाधड़ी और साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदम को लेकर जानकारी मांगी थी। डॉ रावत ने देश में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से की गई शिकायतों की संख्या, उन मामलों पीड़ितों को दी गई राहत या सहायता, डिजिटल लेनदेन में सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा उठाए गए कदम, जामताड़ा (झारखंड) और मेवात (हरियाणा) क्षेत्रों में बढते साइबर अपराध के कारण इन क्षेत्रों को संवेदनशील क्षेत्रों के रूप में चिह्नित करने को लेकर भी जानकारी मांगी।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि सरकार डिजिटल लेन-देन में धोखाधड़ी को रोकने के लिए विनियामकों और अन्य हितधारकों के परामर्श से समय-समय पर कई तरह की पहल कर रही है।
उन्होंने बताया कि बैंकों को सलाह दी गई है कि वे वास्तविक समय लेन-देन निगरानी के लिए सुदृढ़ सॉफ्टवेयर का विनियोजन और अंगीकरण सुनिश्चित करें तथा संदिग्ध एवं धोखाधड़ीपूर्ण लेन-देन पैटर्न का पता लगाने के लिए एआई या एमएल उपकरणों का उपयोग करें साथ ही साथ म्यूल नेटवर्क की पहचान करने में नेटवर्क एनालिटिक्स का उपयोग सुनिश्चित करें। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन से संबंधित धोखाधड़ी को रोकने के लिए, डिवाइस बाइंडिंग, टू-फैक्टर अधिप्रमाणन, दैनिक लेनदेन सीमा, उपयोग के मामलों पर सीमा और अंकुश आदि जैसे उपाय लागू किए गए हैं।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि धोखाधड़ीपूर्ण लेन-देन के कारण ग्राहकों को होने वाले नुकसान की भरपाई करने में मदद करने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक ने 6 जुलाई, 2017 के परिपत्र के माध्यम से बैंकों को अप्राधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के मामलों में ग्राहकों की देयता (जैसे शून्य देवता, सीमित देयता और बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के अनुसार देयता) को सीमित करने के निर्देश जारी किए।
भारतीय रिजर्व बैंक और बैंक लघु एसएमएस, रेडियो अभियान, साइबर अपराध की रोकथाम के संबंध में प्रचार आदि के माध्यम से जागरूकता अभियान भी चलाते रहे हैं। सरकार और आरबीआई ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को परामर्श भी जारी किया है कि वे उच्च जोखिम वाले क्षेत्राधिकार से जुड़े लेनदेन की निगरानी करें और कर्मचारियों को साइबर-सक्षम धोखाधड़ी का पता लगाने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान करें, पाठ्यक्रम में रेड-फ्लैग संकेतकों को शामिल करें।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!