शिक्षकों को गुरु बनने और शिक्षार्थियों को विद्यार्थी बनने की जरूरत
शिक्षा सिर्फ ज्ञान देती है,और विद्या संस्कार और शिष्टाचार : एस एस सारंगदेवोत
उदयपुर 13अक्टूबर। राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय उदयपुर का दो दिवसीय जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन का उद्घाटन समारोह जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ-विश्वविद्यालय प्रताप नगर,उदयपुर के सभागार में आयोजित हुआ ।सम्मेलन में प्रथम दिन नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, शिक्षा,शिक्षार्थी व शिक्षक हितों पर चर्चा, शैक्षिक व संगठनात्मक विषय पर विचार-विमर्श किया गया। उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि शिक्षाविद राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति डाॅ•एस एस सारंगदेवोत थे । कार्यक्रम की अध्यक्षता सुरेंद्र सिंह राव ने की शैक्षिक सम्मेलन के मुख्य वक्ता शिक्षा विद मुरलीधर थे। विशिष्ट जिलाध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह झाला, संगठन मंत्री चंद्रशेखर परसाई,प्रदेश पर्यवेक्षक एवं प्रदेश महिला मंत्री जयमाला पानेरी, जिला महिला मंत्री उमा राका आदि थे। अतिथियो द्वारा मां सरस्वती को दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई । स्वागत उद्बोधन जिला अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह झाला ने प्रस्तुत करते हुए गत वर्ष में संगठन द्वारा शिक्षकों ,शिक्षार्थियों एवं समाज के हित के लिए किए गए विभिन्न कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। सदस्यता संख्या के मामले में उदयपुर जिले के 8094 सदस्यों के साथ राजस्थान में प्रथम रहने पर उन्होंने सभी शिक्षकों उप शाखाओ के पदाधिकारी को धन्यवाद ज्ञापित किया। जिला शाखा द्वारा सभी अतिथियों का तिलक, पगड़ी, ऊपरना स्मृति चिन्ह, भेंट कर और जिला पदाधिकारीओ का ऊपरना ओडा कर स्वागत अभिनंदन किया गया। मुख्य अतिथि जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति एस एस सारंगदेवोत ने अपने उद्बोधन में कहा की शिक्षा और विद्या में फर्क है शिक्षा सिर्फ ज्ञान देती है लेकिन विद्या संस्कार और शिष्टाचार सिखाती है आज के शिक्षकों को गुरु बनने की और शिक्षार्थियों को विद्यार्थी बनाने की सख्त आवश्यकता है। नई शिक्षा नीति पर उन्होंने कहा कि मेकाले की शिक्षा पद्धति ने हमारी संस्कृति को नष्ट करने का कार्य किया, लेकिन यदि शिक्षक वर्ग नई शिक्षा नीति 2020 को सही ढंग से लागू कर देता है तो आने वाले 10 से 15 सालों में भारत की 70 प्रतिशत युवा आबादी स्किल बेस्ड हो जाएगी और जापान की तरह सीधे रोजगार प्राप्त कर लेगी। कार्यक्रम का संचालन जिला मंत्री चंदनमल बागड़ी ने किया। मुख्य वक्ता मुरलीधर ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा की शिक्षक ही वह वर्ग है जो किसी भी बालक या इंसान को पशुता से मनुष्यता की ओर ले जाने का कार्य करते हैं ,हम नैतिक आधार के बिना शिक्षा और संस्कार नहीं दे सकते । सनातन संस्कृति और जीवन मूल्यों का आधार ही देश प्रेम होता है देश प्रेम के बिना सर्वनाश निश्चित है। प्रदेश पर्यवेक्षक जयमाला पानेरी ने अपने उद्बोधन में कहा की संगठन ही समर्पण और समर्पण ही संगठन होता है शिक्षा ही प्रगति एवं परिवर्तन का वास्तविक माध्यम होती है, विद्यार्थियों में संस्कार निर्माण करना आज की महती आवश्यकता है, शिक्षक संघ राष्ट्रीय का कार्य सिर्फ शिक्षकों की समस्याओं के लिए कार्य करना ही नहीं है बल्कि सामाजिक समरसता,शिक्षक सम्मान, प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का सम्मान, जन जागरण ,गुरु वंदन और देश व समाज हित के कार्य करना भी है। ऐसे विचारों के चलते ही इस संगठन का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 36 विभिन्न वैचारिक संगठनों से जुड़ाव है। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सुरेंद्र सिंह राव ने कहा की हमें ‘विद्यालय मेरा तीर्थ ‘ को जीवंतता से लागू करना है, शिक्षक और राजा कभी सुख प्राप्त नहीं कर सकते वे जितने दुखी, व्यतीत, पीड़ा वेदना को सहेंगे,उतना देश आगे बढ़ता जाएगा, पीढ़ी तेजस्वी होती जाएगी। क्योंकि शिक्षक की बात विद्यार्थी को अंदर से अपील करती है, शिक्षा का प्रारंभ ही प्रश्न करना और उसके कारण को जानने से होता है। उन्होंने लिक से हटकर किंककर्तव्यमूढ को आत्मसात कर मेरा जन्म क्यों हुआ है इसे जानने का प्रयास करने की बात कही। अंत में आभार और धन्यवाद ज्ञापन संगठन मंत्री चंद्रशेखर परसाई ने किया। जिला मीडिया प्रभारी गोपाल मेहता मेनारिया ने बताया कि सम्मेलन में बद्री देवी जिला महिला संगठन मंत्री,वगतलाल शर्मावरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष,सुधीर शर्मा जिला उपाध्यक्ष,
वन्दना शर्मा जिला महिला उपाध्यक्ष, ओमप्रकाश चोबीसा जिला सभाध्यक्ष, कर्णसिह झाला जिला उपसभाध्यक्ष, पुष्षेन्द्र कुमार जोशी जिला उप सभाध्यक्ष, हेमंत मेनारिया अतिरिक्त जिला मंत्री,पारस जैन संयुक्त जिलामंत्री, शैलेश कोठारी जिला सह संगठन मंत्री, शंकरलाल जाट उपाध्यक्ष माध्यमिक शिक्षा ,राकेश मेनारिया जिला कोषाध्यक्ष, जसवंतसिंह पंवार पूर्व जिलाध्यक्ष एवं वरिष्ठजन सुन्दरलाल जैन,पुरुषोत्तम दवे,चन्द्रप्रकाश मेहता, प्रकाश वया,भेरूलाल तेली, राजकमल लोहार, राजेन्द्रसिहं सारंगदेवोत, बसंतीलाल श्रीमाली, एवम समस्त जिला कार्यकारिणी सहित सैकड़ो शिक्षक उपस्थित थे।
