एमपीयूएटी में शान से फहराया तिरंगा

पेटेन्ट, नवाचार और शोध प्रकाशन एमपीयूएटी का ट्रेडमार्क: डॉ कर्नाटक
शिक्षा, अनुसंधान व प्रसार क्षेत्र के 70 कार्मिकों, छात्रों व किसानों का हुआ सम्मान
उदयपुर, 15 अगस्त। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अजीत कुमार कर्नाटक ने कहा कि अब एग्रीकल्चर नहीं बल्कि स्मार्ट एग्रीकल्चर का जमाना है। खासकर प्रजाति डवलपमेंट की दिशा में विशेष काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा के पेटेन्ट, नवाचार और शोध प्रकाशन एमपीयूएटी का नया ट्रेडमार्क बन गया है। उन्होंने एमपीयूएटी के स्वर्णिम इतिहास की चर्चा करते हुए विभिन्न फसलों की किस्म विकास, तकनीक विकास, बीजोत्पादन, बकरी व भैस की नस्लों का पंजीयन आदि पर भी चर्चा की।
डाॅ. कर्नाटक गुरुवार को एमपीयूएटी के प्रशासनिक भवन के प्रांगण में आयोजित 78 स्वतंत्रता दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व कुलपति ने ध्वजारोहण किया और मार्च पास्ट की सलामी ली। उन्होंने कहा कि  15 अगस्त 1947 का दिन हमारे देश का शिखर दिवस था। देश आजाद हुआ उस दिन 536 राजा-रजवाड़ों के राज्य हमारे देश में अस्तित्व में थे। संयुक्त भारत बना तो सबसे पहले मेवाड़ ने पहल की और महाराणा भोपाल सिंह जी ने सर्वप्रथम हस्ताक्षर किए। इसी पीढ़ी के पूर्वज महाराणा प्रताप के नाम पर इस विश्वविद्यालय का नाम देश में बहुत गर्व से लिया जाता है। अदम्य साहस के धनी महाराणा प्रताप ने मुगलों से लोहा लेते हुए मेवाड़ को कमी झुकने नहीं दिया। आजादी के साथ ही भारत ने 200 वर्ष के उपनिवेशिक शासन से मुक्ति पाई।
70 लोगों का सम्मान
समारोह में शिक्षण, अनुसंधान व प्रसार क्षेत्र में श्रेष्ठ काम करने वाले लगभग 70 वैज्ञानिकों, कर्मचारियों व छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में एमपीयूएटी के अधीन सभी आठ कृषि विज्ञान केन्द्र में प्रत्येक से 2 किसानों को सम्मानित किया।
सम्मानित होने वाले किसान – भीलवाड़ा प्रथम- श्री महावीर शर्मा, श्री बाबूलाल जाट, शाहपुरा- श्री रूपचंद धाकड़, श्री जगदीशचंद मीणा, चित्तौड़गढ़- श्री भेरूलाल धाकड़, श्री शांतिलाल जाट, प्रतापगढ़- श्री जगदीश मीणा, श्री राजू निनाम, राजसमंद- श्री हरिलाल सिंयाल, श्री चंद्रकांता बैरवा, वल्लभनगर- श्री दूदाराम मेघवाल, श्री शंकर लाल डांगी, बांसवाड़ा- श्री हितेश रावत, श्री विपुल डामोर, डूगंरपुर- श्री शंकर लाल मीणा, श्री ईश्वर सिंह चैहान।
आठ कृषि विज्ञान केन्द्र में बांसवाड़ा को सर्वश्रेष्ठ केवीके का पुरूस्कार दिया गया। डाॅ. बी.एस. भाटी ने यह पुरस्कार ग्रहण किया। औषधीय व सुगंधित पादप के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए डाॅ. अमित दाधीच को पुरस्कृत किया गया। मशरूम के क्षेत्र में एन.एल. मीणा को पुरस्कृत किया गया। इनके अलावा जैविक खेती, मशरूम उत्पादन, गृह विज्ञान, अनुसंधान के क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया।
प्रताप गौरव पुरस्कार की घोषणा व शुरूआत
प्रथम पुरस्कार कुल सचिव कुमावत को दिया
कुलपति डाॅ. कर्नाटक ने समारोह में इसी वर्ष से प्रताप गौरव पुरस्कार देने की न केवल घोषणा की बल्कि प्रथम प्रताप गौरव पुरस्कार के लिए कुल सचिव श्री बंशीधर कुमावत को नामित करते हुए उन्हें इससे नवाजा गया।डाॅ. कर्नाटक ने कहा कि प्रताप गौरव पुरस्कार प्रति वर्ष में दो बार किया जाएगा। प्रतिवर्ष हर 15 अगस्त व 26 जनवरी को दिए जाने वाला यह पुरस्कार के लिए विश्वविद्यालय व बाहरी संस्थाओं में कार्यरत हर वह कार्मिक इस पुरस्कार के लिए पात्र होंगे, जिन्होंने एमपीयूएटी की उन्नति, समृद्धि में अपना अहम् योगदान दिया। साथ ही कृषि उधमी, शोध, प्रसार सहित विश्वविद्यालय के लिए किसी भी क्षेत्र में काम करने वाले इस पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए बकायदा कमेटी गठित होगी जो पुरस्कार का निर्धारण करेंगे।
By Udaipurviews

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