– राष्ट्र गौरव और स्वाभिमान के प्रतीक को विद्यापीठ परिवार ने किया नमन
उदयपुर। वीरता, त्याग और स्वाभिमान के प्रतीक मेवाड़ के महान शासक महाराणा प्रताप के राज्य तिलक दिवस के पावन अवसर पर आज जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ पुष्पांजलि अर्पित की गई।
यह कार्यक्रम विद्यापीठ के कुलपति मानद कर्नल प्रो. शिव सिंह सारंगदेवोत, कुलाधिपति बी.एल. गुर्जर तथा पीठ स्थविर डॉ. कौशल नागदा के सान्निध्य में गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। उपस्थित जनों ने महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनके अदम्य साहस, राष्ट्र निष्ठा और स्वाधीनता के संकल्प को स्मरण किया।
इस अवसर पर कुलपति मानद कर्नल प्रो. शिव सिंह सारंगदेवोत ने अपने उद्बोधन में कहा कि महाराणा प्रताप केवल मेवाड़ के शासक नहीं, बल्कि भारतीय स्वाभिमान और स्वतंत्रता चेतना के अमर प्रतीक हैं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, राष्ट्रहित और स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य तिलक दिवस केवल ऐतिहासिक स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का भी दिन है। महाराणा प्रताप ने कठिन वनवास, अभाव और संघर्ष का जीवन स्वीकार किया, परंतु पराधीनता को स्वीकार नहीं किया। उनका यह त्याग और दृढ़ संकल्प आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है।
कुलपति महोदय ने विद्यार्थियों और शिक्षकों से आह्वान किया कि वे महाराणा प्रताप के आदर्शों—साहस, सत्यनिष्ठा, कर्तव्यपरायणता और राष्ट्रभक्ति को अपने जीवन में आत्मसात करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण है।इस अवसर पर कुलाधिपति बी.एल. गुर्जर तथा पीठ स्थविर डॉ. कौशल नागदा ने भी प्रताप की वीरता और साहस पर अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर विद्यापीठ परिवार के अनेक वरिष्ठ शिक्षाविद एवं अधिकारी उपस्थित रहे। डॉ. तरुण श्रीमाली, डॉ. चंद्रेश छतलानी, डॉ. सुनील चौधरी, डॉ. शैलेंद्र मेहता, निजी सचिव के.के. कुमावत, जितेंद्र सिंह चौहान, विकास डांगी, अर्जुन दास वैष्णव, डॉ. ललित सालवी सहित विभिन्न संकायों के डीन एवं डायरेक्टर्स ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
समारोह के अंत में सभी उपस्थित जनों ने राष्ट्रहित, स्वाभिमान एवं सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा हेतु निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम राष्ट्र गौरव की भावना से ओतप्रोत वातावरण में सम्पन्न हुआ।
