समन्वय से काम कर आमजन तक पहुंचाएं योजनाओं का लाभ- जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री

जिला परिषद की साधारण सभा बैठक
वर्ष 2024-25 के लिए मनरेगा पूरक वार्षिक कार्ययोजना का अनुमोदन
उदयपुर, 21 जून। जिला परिषद उदयपुर की साधारण सभा बैठक शुक्रवार को जिला परिषद सभागार में जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री श्री बाबूलाल खराड़ी व सांसद डॉ मन्नालाल रावत के आतिथ्य एवं जिला प्रमुख श्रीमती ममताकुंवर की अध्यक्षता में हुई। जिला कलक्टर अरविन्द पोसवाल के सान्निध्य में हुई बैठक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत वर्ष 2024-25 के लिए 31091.15 लाख रूपए की पूरक वार्षिक कार्ययोजना का अनुमोदन किया गया। बैठक में उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन, उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी, मावली विधायक पुष्कर डांगी, धरियावाद विधायक थावरचंद मीणा, उप जिला प्रमुख पुष्कर तेली सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण भी मौजूद रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए केबिनेट मंत्री श्री खराड़ी ने कहा कि जिला परिषद साधारण सभा पूरे जिले का प्रतिनिधित्व करती है। इसमें रखे जाने वाले प्रस्तावों और सुझावों पर गंभीरता से चिंतन मनन हो। व्यावहारिक प्रस्तावों पर त्वरित अमल होना चाहिए। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को समन्वित रूप से काम करते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने का आह्वान किया। प्रारंभ में जिला परिषद मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती कीर्ति राठौड़ ने स्वागत करते हुए गत बैठक कार्यवाही विवरण अनुमोदनार्थ प्रस्तुत किया। सदन ने सर्वसम्मति से अनुमोदन किया। जिला प्रमुख ममता कुंवर पवार ने कहा कि विभागीय अधिकारी सदन की गरिमा को ध्यान में रखते हुए संवेदनशीलता के साथ जानकारियां सदन को साझा करें। सदन से मिलने वाले निर्देशों एवं सुझावों को प्रभावी रूप से धरातल पर लागू भी करें। उन्होंने साधारण सभा में अनुपस्थित विभागीय अधिकारियों के विरूद्ध आवश्यक कार्रवाई की भी बात कही।
बैठक में विभागवार योजनाओं तथा कार्यों की प्रगति पर चर्चा की गई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ शंकर बामणिया ने आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले में कार्ड वितरण की प्रगति से अवगत कराया। साथ ही मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए विभागीय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने सिकल सेल एनीमिया जांच के बारे में विस्तृत चर्चा की। सदस्यों ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन सिकल सेल डिजीज के लिए पृथक भवन का प्रस्ताव लेते हुए राज्य सरकार को प्रेषित किए जाने की बात कही। इस पर सीएमएचओ ने इस संबंध में जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री श्री खराड़ी की ओर से दिए गए आश्वासन से अवगत कराया। सदस्यों ने पीएचसी-सीएचसी स्तर पर चिकित्सकों और स्टाफ का संबंधित मुख्यालय पर निवास सुनिश्चित किए जाने, अस्पतालों में खराब पड़े उपकरणों को दुरूस्त कराने, रिक्त पदों पर वैकल्पिक व्यवस्थाएं, निर्माणाधीन अस्पताल भवनों की गुणवत्ता के लेकर आवश्यक जांच एवं कार्यवाही करने आदि की भी मांग रखी। इस पर सीएमएचओ ने सभी बिंदुओं पर उचित कार्यवाही किए जाने की बात कही।

फॉर्म पोण्ड योजना के लिए विशेषज्ञों की मदद से हो शोधः सांसद
कृषि विभाग की ओर से संचालित फॉर्म पोण्ड योजना में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर विभागीय अधिकारियों ने भौगोलिक विषमता के लिए किसानों की अरूचि को कारण बताया। इस पर सदस्यों ने टीएसपी क्षेत्र के लिए सब्सिडी बढाने का सुझाव दिया। सांसद डॉ मन्नालाल रावत ने कहा कि इसके लिए महाराणा प्रताप कृषि विश्वविद्यालय, एमएलएसयू आदि संस्थानों के विशेषज्ञों का पैनल बनाकर शोध कराया जाना चाहिए, ताकि तथ्यात्मक बातें सामने आ सकें। इसके आधार पर सरकार को टीएसपी क्षेत्र के लिए योजना में विशेष प्रावधान के लिए आग्रह किया जा सकता है। बैठक में कृषि विभाग के माध्यम से किसानों को वितरित किए जाने वाले मिनी किट का भी मुद्दा उठा। सदस्यों ने कई जगहों पर किट वितरण नहीं होना बताया। इस पर टीएडी मंत्री श्री खराड़ी ने कहा कि किसानों को बारिश से पूर्व बीज उपलब्ध कराने के लिए अपेक्षित बजट जारी कर दिया गया है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि अपेक्षित मिनीकिट की तुलना में 50 प्रतिशत किट प्राप्त हो चुके हैं, जिनका वितरण चल रहा है तथा शेष बीज भी जल्द उपलब्ध कराया जाएगा। जिला कलक्टर श्री पोसवाल ने बीज वितरण की सूचना स्थानीय जनप्रतिनिधियों को दिए जाने के निर्देश दिए। सदस्यों ने उद्यानिकी विभाग के माध्यम से सोलर पैनल लगाने की योजना में कथित तौर पर गड़बड़ी की आशंका व्यक्त की। इस पर जनजाति मंत्री ने जांच कराकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए।

कार्य की गुणवत्ता से कोई नहीं समझौता नहींः जिला कलक्टर
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता मोहनलाल मीणा ने विभागीय प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत उदयपुर जिले में 1386 गांवों को नल योजना से जोड़ने के लिए 2234 करोड़ रूपए के कार्य प्रस्तावित हैं। इनमें से 1500 करोड़ के कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं। लगभग 90 गांवों को शत प्रतिशत नल से जोड़ दिया गया है। सदस्यों ने योजना के तहत कुछ स्थानों पर कार्य की गुणवत्ता को लेकर असंतोष जताया। साथ ही पाइप लाइन बिछाने के बाद लंबे समय तक सड़कों की मरम्मत नहीं होने की शिकायत की। इस पर जिला कलक्टर श्री पोसवाल ने कार्य की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने की हिदायत दी। साथ ही सड़क मरम्मत भी यथाशीघ्र कराने के निर्देश दिए। उन्होंने क्षेत्र में हो रहे कार्यों की संपूर्ण जानकारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी दिए जाने के लिए पाबंद किया। जिला प्रमुख ने अंबावाडी क्षेत्र में जल संकट की स्थिति से अवगत कराया। इस पर एसई पीएचईडी ने जलजीवन मिशन के तहत जल्द कार्य प्रारंभ होने का आश्वासन दिया।
ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने मादड़ी डेम को खाली करने पर रोष प्रकट करते हुए संबंधित क्षेत्र में पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर सवाल जवाब किया। पीएचईडी अधिकारियों ने उचित व्यवस्था के लिए आश्वस्त किया।
विधायक ने पेयजल के लिए जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग की मदद से स्वीकृत सोलर पनघट एवं हैण्डपंप की मौका स्थिति की जानकारी भी मांगी। इसी क्रम में झाडोल से जिला परिषद सदस्य ने जल जीवन मिशन के तहत निर्माणाधीन टंकियों से पेयजल वितरण का विस्तार अधिक से अधिक आबादी क्षेत्र में करने की बात कही।

इन बिन्दुओं पर भी चर्चा
सार्वजनिक निर्माण विभाग के संबंध में चर्चा के दौरान सदस्यों ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सड़क सुदृढीकरण कार्य शीघ्र पूर्ण कराने की मांग रखी। डीएमएफटी एवं अन्य मदों के तहत निर्माणाधीन सड़कों की वस्तुस्थिति की भी सदन में चर्चा हुई। उदयपुर-सलूंबर रोड के नवीनीकरण, भटेवर से धरियावद स्टेट हाईवे पर गड्ढो को भरने तथा कैलाशपुरी में सड़क निर्माण कार्य का शीघ्र वर्क आर्डर जारी करने आदि पर भी चर्चा की गई।
विद्युत विभाग की चर्चा के दौरान जीएसएस पर कार्मिकों की उपलब्धता, बिजली पोल के झूलते हुए तार, ग्रामीण इलाकों में पर्याप्त बिजली वितरण सुनिश्चित करने संबंधित अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। वन विभाग के तहत इको सेंसेटिव जोन, आबादी क्षेत्रों में वन्यजीवों के खतरे तथा वनाधिकार पट्टों के संदर्भ में चर्चा की गई। इसके अलावा वन क्षेत्रों में सड़क निर्माण की स्वीकृति तथा विभागीय समन्वय के लिए जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में संयुक्त बैठक आयोजित करने का भी सुझाव दिया। शिक्षा विभाग से जुड़ी चर्चा के दौरान विद्यालय भवनों की स्थिति पर मंथन करते हुए जर्जरहाल विद्यालय भवनों की मरम्मत पर जोर दिया। कार्यालयों में प्रतिनियुक्त शिक्षकों को रिलीव कर संबंधित विद्यालय में भेजने पर भी चर्चा की गई। आबकारी विभाग के तहत जिले में हथकड़ शराब की रोकथाम के लिए विभागीय प्रयासों के संबंध में, पेसा एक्ट के तहत प्रावधान, शहर में चल रही शराब की अवैध दुकानों पर कार्रवाई करने, रात्रि 8 बजे पश्चात शराब बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने को लेकर कार्रवाई किए जाने आदि भी चर्चा की गई।

By Udaipurviews

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