उदयपुर, 12 अप्रैल, झील प्रेमियों ने जिला कलेक्टर से आग्रह किया है कि वे पर्यटन नहीं वरन पर्याटन तथा तीर्थाटन को प्राथमिकता बनाएं।
रविवार को आयोजित झील संवाद में झील संरक्षण समिति से जुड़े डॉ अनिल मेहता ने कहा कि उदयपुर का आकर्षण झीलों, तालाबों, पहाड़ों, बावड़ियों, गोखड़ो तथा देवालयों से है। पर्यटन बढ़ोतरी के नाम पर इस नैसर्गिकता को नष्ट किया जा रहा है। जरूरी है कि उदयपुर पर्यावरण आधारित पर्यटन अर्थात पर्याटन तथा देवालय आधारित तीर्थाटन का केंद्र बने।
झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि झीलों के किनारे के घाट ऐतिहासिक तथा आध्यात्मिक विरासत है। इन पर निरंतर अतिक्रमण एवं अवरोध हो रहे है। जिन्हें रोका जाना चाहिए। घाट संस्कृति को बचाना होगा।
सामाजिक कार्यकर्ता नंद किशोर शर्मा ने कहा कि उदयपुर में बढ़ रहा पर्यटन यहां के सामाजिक व सांस्कृतिक ढांचे के विपरीत है। पर्यटन अश्लीलता , नशाखोरी को बढ़ा रहा है। इस पर लगाम जरूरी है।
सामाजिक कार्यकर्ता विनोद कुमावत ने कहा कि पिछोला को धार्मिक पर्यटन सर्किट घोषित करना चाहिए। अनेकों मंदिरों, देवालयों, आध्यात्मिक स्थलों से घिरा पिछोला पर आध्यात्मिक अनुभूति को बढ़ावा मिलना चाहिए।
शिक्षाविद कुशल रावल ने कहा कि पहाड़ियों तथा बावड़ियों को बचाना उदयपुर की पर्यावरणीय तथा जलीय विरासत को बचाना है ।
संवाद से पूर्व पिछोला का निरीक्षण किया गया।
