उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ की ओर से पंचायती नोहरे में आयोजित धर्मसभा में बोलते हुए श्रमण संघीय प्रवर्तक सुकन मुनी महाराज ने कहा कि जीवन भावनाओं से चलता है। हमेशा अच्छी भावनाओं के साथ आत्म कल्याण का चिंतन करना चाहिए। मैं कहां हूं मैंने क्या किया है मैं क्या कर रहा हूं और मुझे क्या करना है इस विषय पर हमेशा मनुष्य को आत्म चिंतन करते हुए आत्म कल्याण का मार्ग अपनाना चाहिए।
किसी के साथ भी वाद विवाद कर समय को व्यर्थ गंवाने से ना तो स्वयं का भला होता है और नहीं जीवन का भला हो सकता है। इस जीवन का कोई भरोसा नहीं है। मनुष्य सोचता क्या है और हो क्या जाता है। इसलिए हमेशा हर कार्य को कल पर नहीं छोड़ते हुए आज ही करने का उपक्रम करना चाहिए। जीवन में कोई भी परेशानियां या कठिनाइयां आए हमें धर्म ध्यान और तप आराधना से उन्हें हल करने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में कोई भी कार्य ऐसा नहीं है जो तप साधना से पूर्ण नहीं हो सकता है।
डॉ वरुण मुनि ने ब्रह्मचर्य का महत्व बताते हुए कहा कि जिसके पास ब्रह्मचर्य है उसका जीवन सार्थक और मजबूत है। कई बार श्रावक श्राविकाओं में यह भ्रम फैला होता है की ब्रह्मचर्य का पालन करने का दायित्व केवल साधुओं का ही होता है। जबकि ऐसा नहीं है। साधु का मतलब ही ब्रह्मचर्य है। बिना ब्रह्मचर्य के तो साधु हो ही नहीं सकता।
धर्मसभा में अखिलेश मुनि ने गीतिका प्रस्तुत की। महामंत्री एडवोकेट रोशन लाल जैन ने बताया कि चातुर्मास काल से ही णमोकार महामंत्र की धर्म आराधना निरंतर जारी है। शनिवार को बाहर से आए अतिथियों का धर्म सभा में स्वागत अभिनंदन किया गया। धर्मसभा में मेवाड़ वागड़ क्षेत्र सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का आना लगातार जारी है।
अच्छी भावनाओं के साथ आत्म कल्याण का चिंतन करेंःसुकनमुनि
