उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ की ओर से सिन्धी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में आयोजित धर्मसभा में बोलते हुए श्रमण संघीय प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज ने कहां कि भगवान महावीर ने अपनी वाणी में छोटी-छोटी बातों से भी मनुष्य को आत्म कल्याण का मार्ग बताया है। जहां प्रेम होता है वहीं प्रभु का वास होता है। प्रेम तो हर जगह मिलता है। पिता का पुत्र से पति का पत्नी से भाई का बहन के प्रति, लेकिन इसमें प्रेम कम और राग ज्यादा होता है। जहां राग और स्वार्थ होता है वह सच्चा प्रेम नहीं होता है।
जहां कोई स्वार्थ नहीं हो वहीं पर सच्चा प्रेम होता है। निस्वार्थ व्यक्ति ही प्रेम का पुजारी बन पाता है। प्रेम तो गुरु और शिष्य में भी होता है। वह प्रेम निश्चल और निस्वार्थ का होता है। ऐसा प्रेम होने पर शिष्य गुरु से ज्ञान प्राप्त कर पाता है। दुनिया में प्रेम के कई प्रकार होते हैं। कई लोग किसी से प्रेम इसलिए करते हैं कि उनका कोई काम या स्वार्थ होता है। ज्यूं ही उसका काम हुआ और वह प्रेम वहीं खत्म हो जाता है। प्रेम के अंदर भावनाए पवित्र होनी चाहिए। जहां शुद्ध भावनाओं के साथ निस्वार्थ प्रेम होता है वहां पवित्रता होती है और प्रभु भी वहीं आकर निवास करते हैं। प्रेम तो मीराबाई ने किया था। उनका निस्वार्थ प्रेम आज भी जन-जन के लिए प्रेरणादाई है।
डॉ वरुण मुनि ने धर्म सभा में सुगंध और दुर्गंध के बारे में बताते हुए कहा कि दोनों का अपनी अपनी जगह अलग-अलग महत्व है। मनुष्य जीवन में सुगंध के बारे में इतना ही जानता है कि उसे खाने-पीने की चीजों में सुगंध और स्वाद चाहिए। वह खाने में सुगंध और स्वाद को बढ़ाने के लिए नाना प्रकार की चीजों को उनमें डाल देते हैं। जीवन में हमेशा अच्छे कर्म और पुण्य कर्म करें जिससे आपके चरित्र से हमेशा अच्छाई की सुगंध आए। ऐसे बुरे कर्म न करें जिससे कि आपका चरित्र की दुर्गंध चारों ओर फैले और आपसे अपने ही दूर हो जाए। इसलिए जीवन को सफल बनाने के लिए अच्छे कर्मों और पुण्य से अपने जीवन में चरित्र की सुगंध चारों ओर फैलाएंगे तभी आपका जीवन सफल हो पाएगा।
महामंत्री एडवोकेट रोशन लाल जैन ने बताया कि गुरुवार को भी बाहर से आए हुए अतिथियों का धर्म सभा में स्वागत अभिनंदन किया गया। उन्होंने कहा कि चातुर्मासकाल से शुरू हुई धर्म आराधना चातुर्मास के अंतिम चरण में भी अनवरत जारी है।
शुद्ध भावनाओं के साथ निस्वार्थ प्रेम होता है वहां पवित्रता होती: सुकनमुनि
