विद्यापीठ में प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप की 484वीं जयंती पर किया नमन
उदयपुर 9 जून / वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप की 484वीं जयंती पर रविवार को जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के प्रताप नगर परिसर स्थित महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं सम्मान समारोह का आयोजन गया।
कुलपति कर्नल प्रो. एस. एस. सारंगदेवोत ने महाराणा प्रताप को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि संप्रभुता और न्याय के रक्षक मेवाड़ के महान योद्धा महाराणा प्रताप की जयंती के अवसर पर उनकी मुगल साम्राज्य के विरुद्ध अटूट वीरता, संघर्षशीलता और साम्प्रदायिक सद्भाव के साथ किये गए प्रतिरोध को याद किया जाना चाहिए। हमारे राष्ट्र के जन-जन में स्वाधीनता की भावना को मूर्त रूप देने में अटूट वीरता के प्रतीक महाराणा प्रताप की विरासत स्वरूप हमें रणनीतिक प्रतिभा और वीरतापूर्ण देशभक्ति प्राप्त हुई है। अंग्रेजों से हम स्वाधीन हुए हैं तो उसका एक मुख्य कारण हमारे रक्त में इस भावना का होना भी है।
उन्होंने बताया कि विद्यापीठ में विद्यार्थियों को महाराणा प्रताप के जीवन और भारतीय इतिहास में उनके योगदान को बताने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। देश के प्रबुद्ध इतिहासकारों द्वारा उनकी सैन्य रणनीतियों और नेतृत्व गुणों पर चर्चा करने के लिए विभिन्न संगोष्ठियों का आयोजन भी किया जाएगा, जो आज के समय में उनकी प्रासंगिकता पर बल देंगे। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप की विरासत हमें साहस, दृढ़ संकल्प और अपनी मातृभूमि के प्रति भक्ति के मूल्यों को बनाए रखने और हमें प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने के लिए प्रेरित करती है, जिनकी आज भी आवश्यकता है।
इस अवसर पर रजिस्ट्रार डॉ. तरुण श्रीमाली, डॉ. भवानी पाल सिंह राठौड़, डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी, निजी सचिव कृष्णकांत कुमावत, राजू शर्मा, त्रिभुवन सिंह, मुकेश, दुर्गा शंकर, डॉ. ललित सालवी, मनोज यादव सहित विद्यापीठ के कार्यकर्ता उपस्थित थे।
