करंट से घायल कर्मी की मौत: 10 लाख मुआवजे और नौकरी की मांग के बाद माने परिजनों 

-लापरवाही बिजली निगम के अधिकारियो ने छह दिन बाद  नहीं लगाया जिओ
– शव एसई ऑफिस के बाहर रखा

जुगल कलाल
डूंगरपुर,21 अगस्त(ब्यूरो) डूंगरपुर में 6 दिन पहले एक बड़ा हादसा हुआ जिसमें अस्पताल के 33 और 11 केवी जीएसएस पर काम करते समय एक एफआरटी कर्मचारी करंट लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया था। सोमवार देर रात, इस कर्मचारी की उदयपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। मंगलवार सुबह, परिवारजन शव को एंबुलेंस में डालकर डूंगरपुर एसई कार्यालय पहुंच गए और प्रदर्शन शुरू कर दिया।  इसके बाद शव को एसई दफ्तर के बाहर रख दिया। 7 घंटे चले प्रदर्शन के बाद 10 लाख रुपए ठेका कंपनी से समझौता होने के बाद परिजन माने। वहीं, मृतक के परिवार को इंसोरेज और निगम की तरफ़ से दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता की जाएगी।

तीन कार्मिक हुए थे घायल
हादसा 14 अगस्त को हुआ जब बिलडी फीडर का मेंटेनेंस का काम चल रहा था। इस दौरान, शटडाउन के बावजूद, डोडिया निवासी रमेश अहारी और दो अन्य कर्मियों को करंट लग गया। तीनों कर्मचारी नीचे गिर गए, और रमेश को गंभीर चोटें आईं। रमेश को उदयपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां 6 दिनों तक इलाज के बाद सोमवार रात ढाई बजे उसकी मौत हो गई। मंगलवार को, परिवारजन सुबह 9 बजे शव को लेकर एसई कार्यालय पहुंचे और वहां धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। एसडीएम नीरज मिश्र, भाजपा नेता बंशी लाल कटारा, बीएपी ज़िला अध्यक्ष अनुतोष रोत और अन्य अधिकारी के साथ परिजनों के 7 घंटे तक समझौता वार्ता चली। इसके बाद  अंततः समझौता हुआ जिसमें ठेका कंपनी से 10 लाख रुपये, पेंशन, बीमा राशि और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया गया। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम किया गया।

“हादसे के 6 दिन बाद भी नहीं लगाया गया जिओ, सुरक्षा में भारी चूक”
यह हादसा इसलिए हुआ क्योंकि बिलडी फीडर पर आवश्यक सुरक्षा उपाय के लिए तकनीकी भाषा जैसे जीओ (गैंग ऑपरेटर स्विच) नहीं लगाया गया था।  जिओ के बिलजी सप्लाई बंद करने के बाद उसे बंद किया जाता है ताकि रिटर्न करंट ना आए।  लेकिन अस्पताल में बिजली बंद होने के तुरंत बाद डीसी सेट शुरू हो जाने से रिटर्न करंट आ गया, जिससे तीनों कर्मी करंट की चपेट में आ गए। हैरानी की बात हो यह है की हादसे के 6 दिन बाद लापरवाह अधिकारियो ने फीडर पर जीओ नहीं लगाया। ऐसे में बिजली निगम के कर्मचारियों की कार्यशैली पर एक बार फिर से सवाल खड़े हो गए।

तीन माह तीसरा बड़ा हादसा
तकनीक कर्मचारी की करंट लगने से मौत होने का पहला मामला नहीं हैं। इसे पहले  जुलाई माह में धनेश्वर फीडर पर काम करते समय महारावल स्कूल के पास एक तकनीकी कर्मचारी को करंट लगने से जान चली गई थी। इस हादसे में भी शट डाउन होने के बावजूद अचानक करंट दौड़ गया था। इससे पहले अप्रैल माह में डिमिया फीडर में काम करते हुए अचानक करंट आने से एक ठेके का तकनीकी कर्मचारी विकलांग हो गया। उसकी जांच अभी तक चल रही है। हर वार डिस्कॉम के अधिकारियों की कमजोर मॉनिटरिंग के कारण तकनीकी कर्मचारियों को नुकसान उठाना पड़ता है।

मृतक की मौत की जांच करवाएंगे 

वर्जन – कार्मिक के मौत के बाद ठेका कंपनी से 10 लाख की- आर्थिक सहायता दे पर सहमति बनी है। इसी के साथ इंश्योरेंस और निगम की तरफ 2 लाख रुपए और सहायता की जाएगी। मृतक की मौत को लेकर जांच करवाई जा रही है। जीओ नहीं लगा है इसको जल्द लगवाया जाएगा।

By Udaipurviews

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