भीषण गर्मी के दौर में भी कम नहीं हुई मेले की रौनक

उदयपुर। जोधाणा पब्लिसिटी द्वारा फतह स्कूल मैदान में 30 दिवसीय मेट्रोड्रीमलैंड मेले में मेले में भीषण गर्मी के दौर के बावजूद मेले में मेलार्थियों की हलचल में कोई नहीं हुई है। मेला शुरू होते ही प्रवेशार्थियों की रैलमपेल प्रारम्भ हो आती है। जोधाणा पब्लिसिटी दिनेश गौड़ ने बताया कि ज्यादातर लोग अपने परिवार सहित मेले में पहुंचे। मेले में बच्चों के मनोरंजन के लिए भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। चकरी, डोलर, झूले, उनके खेलने के आयटम, उनके कपड़े, गर्मी में पहने जाने वाले खास डिजाईन किये बच्चों के कपड़ों की भी मेले में खूब खरीददारी हो रही है। दोपहर में 12 बजे से शाम 3 बजे तक तो लोगों का घरों से निकलना भी दुभर हो रहा है लेकिन खरीददारी के शौकीनों को भीषण गर्मी से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। यहां पर सवेरे शाम के अलावा दोपहर में भी लगभग हर स्टॉल पर मेलार्थी अपनी पसन्द की वस्तुएं खरीदते हुए देखे जा सकते हैं।  हालांकि शाम को तो मेला अपने पूरे यौवन पर होता ही है लेकिन दोपहर में भी मेला स्थल लगातार चलता रहता है। इससे पता चलता है कि उदयपुर वालों को अच्छी और क्वालिटी की वस्तुओं की कदर है और वह किसी भी कीमत पर यह मौका छोडऩा नहीं चाहते हैं।
यहां पर हर चीज की सेल लगी हुई है। वाजिब दामों पर हर वर्ग के पसन्द ही चीजें यहां पर उपलब्ध हैं। मेले में चारों और घूम- घूम कर लोग अपनी पसन्द की चीजें खरीदते हैं। आखिर दो घंटे मेले में घूमने के बाद भूख लगना स्वाभाविक है। इसलिए अपनी खरीददारी का काम निबटा के लोग सीधे ही फूड जोन का रूख करते हैं।
शनिवार को हर स्टॉल पर खरीददारों की भीड़ रही। महिलाओं ने घर में काम आने वाने प्लास्टिक के आयटमों को खरीदने में ज्यादा रूचि दिखाई। प्लास्टिक के आयटम खरीदने वाली कुछ महिलाओं ने बताया कि प्लास्टिक के आयटमों की खासियत यह होती है एक तो वह बहुत ही हल्के होते हैं। इस जगह अगर लोहे कह बाल्टियां या तगारी खरीदें तो उनमें वजन भी होता है। वह प्लास्टिक के आयटमों के मुकाबले काफी महंगे होते हैं। दूसरी सबसे बड़ी बात यह कि लोहे के आयटमों में हल्का सा पानी लगने से उनमें जंग लग जाता है और वह खराब भी हो जाते हैं। प्लास्टिक के आयटम सस्ते भी होते हैं ओर टूट जाने के बाद भी कोई गम नहीं होता है। इसलिए अब घरों में महिलाएं लोहे कह तगारी की जगह प्लास्टिक का टब और लोहे की बाल्टियों की जगह प्लास्टिक की बाल्टियां इस्तेमाल करती है।
गौड़ ने बताया कि मेले में फर्नीचर हैंडलूम कपड़े वे ज्वेलरी सहित कई स्टॉल्स मेले में लग चुकी है। उन्होंने बताया कि फर्नीचर, किचन वेयर, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, परफ्यूम, क्रोकरी, फैशन, फिटनेस, कंप्यूटर, शूज, कालीन ,पर्दे, खिलौने, गद्दे, सोफे, चद्दरें ,कारपेट, पानीपत का हैंडलूम,टेराकोटा के डेकोरेटिव आइटम ,साज सज्जा का पूरा सामान, खुर्जा क्राकरी और मेलामेट का क्रोकरी सहित कई स्टाल लगाई गई है साथ ही कपड़े, कॉस्मेटिक, पर्स, साड़ी, अचार मुरब्बे आदि सामान की भी स्टॉल्स लगी हुई हैं जहां पर उचित मूल्य में हर तरह के सामान मिल रहे हैं।
मेले में आये कई मेलार्थियों ने तो बताया कि अब तक शहर मेें जो मेले में लगते आये हैं वो ज्यादा से ज्यादा 10-15 दिन के ही लगते आये हैं। ऐसे में यह मेला पूरे एक महीने का होने से इससे जनता को काफी सुविधा मिल रही है। तनख्वाह भी मिज जाने से पैसों की तंगी करा सामना नहीं करना पड़ रहा है। बचों को भी आराम से उनकी मनपसन्द की चीजें दिलवा पा रहे हैं और जो भी मेले में वह खाने की जिद कर रहे हैं वह उन्हें दिलवा पा रहे हैं।

By Udaipurviews

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