सबसे बड़ा नुकसान युवा वर्ग को सोशल साइट्स से हो रहाःःसुकनमुनि

उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ की ओर से सिंधी बाजार स्थित पंचायती नोहरे में श्रमण संघीय प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज ने चातुर्मास के अवसर पर प्रातः कालीन धर्म सभा में कहां कि धर्म ध्यान करने वाला, तप और साधना करने वाला ही महान होता है। अभी पर्युषण महापर्व हमारे बीच आया। सभी श्रावक- श्राविकाओ ने अपने आत्म कल्याण के लिए खूब धर्म ध्यान किया, तपस्या की और धर्म आराधना की। तपस्या हमारे धर्म का मूल आधार है। जो धर्म ध्यान और तप साधना करता है उसी की महिमा होती है।  आजकल के  युवा धर्म ध्यान  और आत्म कल्याण में विश्वास नहीं करके ज्यादातर अंधविश्वास का सहारा लेने लगे हैं। सबसे बड़ा नुकसान युवा वर्ग को सोशल साइट्स से हो रहा है। इन पर जो भी आता है युवा उनसे इतने प्रभावित हो जाते हैं कि उस पर अंधविश्वास करके अपना कभी-कभी बड़ा नुकसान भी कर बैठते हैं। इसलिए विश्वास करो तो केवल अपने भगवान अपने धर्म और अपनी आत्मा पर करो।
मुनीश्री ने कहा कि धर्म के संस्कार बचपन से ही घर पर ही मिलने चाहिए। घर में ध्यान और पूजा उनकी विधि और उनकी क्रिया अनुसार ही पूर्ण करना चाहिए। अगर बच्चों को बचपन से ही धर्म के बारे में, उपवास के बारे में, प्रतिक्रमण के बारे में या साधना के बारे में घर से ही संस्कार मिलने लगेंगे तो वह अपने आत्म कल्याण के मार्ग पर स्वतह ही अग्रसर हो जाएगा। अगर ऐसा होगा तो बाहरी किसी अंधविश्वास में नहीं पड़ेगा। हमारा आत्म कल्याण का मार्ग महावीर की वाणी में ही है। उन्होंने कहा कि आजकल कई कथित चमत्कारी बाबाओं के झांसे में लोग आ जाते हैं। कथित चमत्कारी बाबा हर समस्या से छुटकारा दिलाने और धन लाभ देने का लालच देते हैं। इसी लालच और  अंधविश्वास में लोग सही और गलत में फर्क भूल जाते हैं और अपना बहुत कुछ नुकसान कर देते हैं। दुनिया में केवल भगवान ही है जो हमारी हर समस्या का निदान कर सकते हैं। और धन लाभ भी देना होता है तो भी भगवान ही दे सकते। व्यक्ति को दुनिया में अपने भाग्य  से ज्यादा कभी न मिला है ना मिलता है। फिर ऐसे अंधविश्वास में आकर के अपने स्वयं का नुक़सान क्यों करना। अगर बचपन से ही धर्म ध्यान के संस्कार मिल जाएंगे तो आगे जाकर बच्चों को ऐसे अंधविश्वास का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।

By Udaipurviews

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