उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ पंचायती नोहरा उदयपुर के तत्वावधान में आयोजित धर्म सभा में जैन संत प्रवर्तक सुकन मुनि ने कहा कि आज कम्प्यूटर का युग है। एक छोटी-सी डिस्क में हजारों दृश्य और विशाल डाटा फीड किया जा सकता है। आज के सुपर कम्प्यूटर से भी एडवांस सुपर-डुपर कम्प्यूटर प्रत्येक जीव के भीतर प्रकृति ने स्थापित किया हुआ है। आज के सुपर-डुपर कम्प्यूटर में चाहे जितना डाटा फीड किया जाए, फिर भी उसकी कोई न कोई सीमा अवश्य होती है। आपके, हमारे प्रत्येक जीव के भीतर कार्माण नामक जो कम्प्यूटर है, उसमें जो डाटा फीड है उसकी कोई सीमा नहीं है। अनन्त अनन्त जन्मों के डाटाज् उसमें सुरक्षित हैं। समय के साथ-साथ वे डाटा खुलते रहते हैं। विविध भवों के रूप में, विविध भावों के रूप में, विविध परिणामों के रूप में उस डाटा से जीव संचालित होता रहता है। थोड़े-से विद्युत के झटके से कम्प्यूटर के डाटा नष्ट भी हो जाते हैं, परन्तु हमारे भीतर जो कम्प्यूटर है वह एक ऐसा सुपर प्रोडक्ट है जो कभी खराब नहीं होता। उसका डाटा सदैव सुरक्षित रहता है।
उपप्रवर्तक अमृत मुनि ने कहा कि राह चलते किसी व्यक्ति को देखकर आपको प्रसन्नता होती है, किसी को देखकर हृदय में छीरू उत्पन्न होती है। ऐसा क्यों है? प्रत्यक्ष कारण कुछ भी नहीं होता। परन्तु कारण प्रत्यक्ष ही तो नहीं होता। प्रत्यक्ष कारणों का संसार तो बहुत सीमित है। अप्रत्यक्ष कारणों का संसार अनन्त है। आपके घर में पुत्र का जन्म होता है। जन्म के क्षण से ही आपकी चेतना उस नवजात के प्रति मोह के सूत्र से सिल जाती है। आपके लिए वह सर्वाधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। आप अपने सुख-दुख को गौण कर देते हैं। उसके सुख-दुख आपके लिए प्रमुख हो जाते हैं। एक अपरिचित और अनजान के लिए आपके हृदय में इतना अपनत्व क्यों उतर आता है? वस्तुतः वह अपरिचित नहीं है। आपकी स्मृति पर थोड़ी धूल आ गई है। वह नवजात आपका बहुत परिचित है। कहीं बिछुड़ गया था, आज लौट आया है। विरह और मिलन का यह सिलसिला अनादिकाल से चल रहा है। राग के भाव संबंधों में अपनत्व घोलते हैं। द्वेष के भाव संबंधों में परत्व घोलते हैं। हर भाव हमारे कार्माण शरीर में सुरक्षित रहता है। समय के परिपाक पर मिलन होता है। जैसे भाव कार्माण शरीर में संचित हैं, निमित्त के आधार पर वे मूर्त्तिमान हो जाते हैं । इस अवसर पर महेश मुनि, अखिलेश मुनि तथा डॉ वरुण मुनि का भी सान्निध्य प्राप्त हुआ।
संघ के महामंत्री एडवोकेट रोशनलाल जैन ने बताया कि इस अवसर पर जैन समाज के वरिष्ठ श्रावक उपस्थित रहे और धर्म सभा में श्राविकाओं ने तपस्या के प्रत्याख्यान ग्रहण किए।
सुपर कम्प्यूटर से भी एडवांस सुपर-डुपर कम्प्यूटर प्रत्येक जीव के भीतर – प्रवर्तक सुकन मुनि
