-टायरों के सड़क पर घिसने से हो रहा प्रदूषण खतरनाक
-युवा वर्ग के लिए हरित तकनीकी क्षेत्र में उद्यमिता की अपार संभावनाएं
-प्रमुख उद्योगपतियों, वैज्ञानिकों व तकनिकीविदों ने रखे विचार
उदयपुर, 21 दिसम्बर, वाहनों के धुंए से ज्यादा प्रदूषण उनके टायरों की रगड़ से है। टायरों के सड़क पर घिसने से निरंतर महीन कण निकलते रहते है। ये विषैले कण हवा व पानी दोनों को घोर प्रदूषित करते हैं व मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हैं। परिवहन जनित कुल वायु प्रदूषण में 52 प्रतिशत योगदान टायरों के घिसने से आता है। ऐसे में जंहा टायरों के निर्माण में वैकल्पिक पदार्थ व नवीन तकनीकी की जरूरत हैं वंही झीलों, तालाबों व इको सेंसिटिव इलाकों में वाहन यातायात पर नियंत्रण जरूरी है। युवा तकनिकीविदों , वैज्ञानिकों के लिए हरित पॉलीमर विज्ञान व तकनीकी में उद्यमिता की अपार संभावनाएं हैं।
यह विचार विद्या भवन पॉलिटेक्निक में आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में व्यक्त किये गए। आयोजन पॉलिटेक्निक के पॉलिमर साइंस व रबर टेक्नोलॉजी विभाग व वी बी आर आई महाविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग द्वारा इंडियन रबर इंस्टिट्यूट के सहयोग से किया गया।
“पॉलिमर विज्ञान और रबर प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्र में उद्यमिता, सामाजिक सशक्तिकरण और सतत हरित विकास” विषयक इस सेमिनार में
यू सी सी आई के पूर्व अध्यक्ष उद्योगपति कोमल कोठारी ने कहा कि माइक्रोप्लास्टिक एक बड़ा खतरा हैं जिसे सामाजिक चेतना से नियंत्रित किया जा सकता है । उन्होंने कहा कि प्लास्टिक कचरे से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए नवीन रीसाइक्लिंग तकनीकों की जरूरत है।
लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष व मोल्ड मेकर्स के प्रबंध निदेशक मनोज जोशी ने कहा कि विकास प्रक्रिया में प्रकृति संरक्षण, धरती माँ की सेवा जैसे भावों व नैतिक मूल्यों को भूलने से मानव समाज प्रदूषण की गंभीर विभीषिका जूझ रहा है। अमेरिका व रूस जैसे देशों की सैन्य आवश्यकताओं के लिए लाइफ जैकेट , लाइफ बोट निर्यात कर रहे उदयपुर के युवा उद्यमी , एडवेंट पोलिकोट के प्रबंध निदेशक अंकित सिंघवी ने पॉलीमर टेक्सटाइल क्षेत्र में स्व उद्यम लगाने की संभावनाओं पर विचार रखे।
जे के टायर के महा प्रबंधक चेतन शर्मा ने टायर संश्लेषण में पर्यावरण अनुकूल हरित व टिकाऊ पदार्थों के बारे में जानकारी दी। इंडियन रबर इंस्टिट्यूट, राजस्थान ब्रांच के अध्यक्ष सुनील कुमार जगासिया ने उद्यम व उद्यमिता को परिभाषित करते हुए टायरों के घिसने से होने वाले प्रदूषण की विभीषिका से अवगत कराया। यूनिवर्सिटी ऑफ पेरिस के प्रो. फिलिप रोजर ने कहा कि हरित तकनीकी क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों को सराहनीय बताया। प्रसिद्ध वैज्ञानिक आई आ आई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ आर मुखोपाध्याय ने भी शुभकामनाएं प्रेषित की। प्रेरक वक्ता यशदेव सिंह ने एक अच्छे उद्यमी के लिए आवश्यक गुणों के बारे में जानकारी दी।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी नवीन व्यास ने युवा उद्यमियों के सलाह, मार्गदर्शन व सहयोग के लिए मंडल की विविध गतिविधियों की जानकारी रखी। विभिन्न सत्रों की अध्यक्षता पॉलीटेक्निक प्राचार्य डॉ अनिल मेहता व वी बी आर आई निदेशक डॉ टी पी शर्मा ने की। सेमिनार संयोजक डॉ विक्रम सिंह कुमावत ने विषय प्रस्तावना रखी। संयोजन डॉ. सबा खान व रागिनी गया गंधर्व ने किया। धन्यवाद आयोजन सचिव डॉ. अंजु जैन ने किया।
